यह ख़बर 30 नवंबर, 2011 को प्रकाशित हुई थी

वृद्धि में गिरावट से भारतीय उद्योग जगत चिंतित

खास बातें

  • उद्योग जगत ने सरकार ने आर्थिक वृद्धि को बनाये रखने के लिए सुधारों को सुनिश्चित रखने के साथ निवेश आकर्षित करने के उपाय करने को कहा है।
नई दिल्ली:

चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में आर्थिक वृद्धि दर 6.9 प्रतिशत रहने को लेकर उद्योग जगत ने गंभीर चिंता जताते हुए बुधवार को कहा कि यह पहले से जारी औद्योगिक क्षेत्र के कमजोर रूख की आधिकारिक पुष्टि है। उद्योग जगत का कहना है कि उंची मुद्रास्फीति, कोष की बढ़ती लागत तथा संकटग्रस्त वैश्विक पूंजी बाजार आर्थिक नरमी के लिये जिम्मेदार है। उद्योग जगत ने सरकार ने आर्थिक वृद्धि को बनाये रखने के लिए सुधारों को सुनिश्चित रखने के साथ निवेश आकर्षित करने के उपाय करने को कहा है। दूसरी तिमाही की वृद्धि नौ तिमाहियों में सबसे कम है। अर्थव्यवस्था की इस गति को देखते हुए सरकार ने अप्रैल-मार्च 2011.12 की वृद्धि का अनुमान घटाकर 7.3 प्रतिशत कर दिया है। उद्योग मंडल सीआईआई ने कहा, चालू वित्त वर्ष की जुलाई-सितंबर तिमाही में आर्थिक वृद्धि दर 6.9 प्रतिशत रहना औद्योगिक क्षेत्र में पहले से दिख रही नरमी की आधिकारिक पुष्टि है। सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा कि यह निवेश में गिरावट का संकेत है और इसमें और गिरावट का अर्थव्यवस्था पर व्यापक नकारात्मक असर हो सकता है। उन्होंने कहा, मुद्रास्फीति पर शिकंजा कसने के लिये रिजर्व बैंक ने पिछले साल मार्च से लेकर अबतक 13 बार नीतिगत ब्याज दरों में वृद्धि कर चुका है जिसके कारण देश में पूंजी की लागत दुनिया में सर्वाधिक हो गयी है। इसका निवेश पर असर पड़ रहा है। उद्योग मंडल फिक्की ने भी कहा कि मौद्रिक नीति को कड़ा किये जाने का असर दिखने लगा है। फिक्की के महासचिव राजीव कुमार ने कहा, मौद्रिक नीति को कड़ा किये जाने का असर दिखने लगा है। अगर वित्त वर्ष 2010-11 की दूसरी तिमाही की आर्थिक वृद्धि को संशोधित कर 8.9 प्रतिशत से 8.4 प्रतिशत नहीं किया जाता तो चालू वित्त वर्ष की जुलाई-सितंबर तिमाही में आर्थिक वृद्धि 6.9 प्रतिशत की बजाए 6.4 प्रतिशत होती। फिक्की के अनुसार मौजूदा स्थिति को देखते हुए चाूल वित्त वर्ष में आर्थिक वृद्धि दर 7 से 7.1 प्रतिशत रहेगी। उद्योग मंडल एसोचैम ने कहा कि उच्च मुद्रास्फीति, कोष की बढ़ती लागत तथा संकटग्रस्त वैश्विक पूंजी बाजार के कारण 2011-11 की दूसरी तिमाही में आर्थिक वृद्धि दर कम हुई है। एसोचैम के महासचिव डी एस रावत ने कहा, रिजर्व बैंक को ब्याज दर कम करना चाहिए ताकि ऋण लागत नीचे आये। दोहरे अंक के करीब पहुंची मुद्रास्फीति के कारण कच्चे माल की लागत बढ़ गयी है जिसके कारण औद्योगिक क्षेत्र में नरमी है। उन्होंने कहा, ऋण संकट से गुजर रहे यूरो क्षेत्र तथा अमेरिका में जबतक स्थिति नहीं सुधरती, भारतीय अर्थव्यवस्था प्रभावित रहेगी। सरकार को जल्दी से राष्ट्रीय विनिर्माण नीति लानी चाहिए और बड़े पैमाने पर निवेश आकषिर्त करने के लिये कदम उठाने चाहिए ताकि आर्थिक वृद्धि दर 7.5 प्रतिशत से नीचे नहीं आये। चंद्रजीत बनर्जी ने कहा, वैश्विक स्थिति को देखते हुए अर्थव्यवस्था की स्थिति काफी हद तक घरेलू नीतियों पर निर्भर करेगी। ऐसे में सुधारों तेजी से लागू करने की जरूरत है।


Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com