नई दिल्ली:
भारत ने रूस द्वारा ब्रिक्स देशों के बीच बहुपक्षीय आर्थिक समन्वय स्थापित करने के उद्देश्य से पेश किए गए एक प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
रूस ने इस प्रस्ताव में कहा है कि ब्रिक्स (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) देश आपस में बहुपक्षीय आर्थिक सहयोग की रणनीति विकसित करें।
भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने मास्को में मंगलवार को संपन्न हुए भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में इस प्रस्ताव पर विचार-विमर्श किया।
ब्रिक्स देशों में सम्मिलित रूप से विश्व की तीन अरब आबादी निवास करती है और इन देशों का संयुक्त रूप से सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 16,00 अरब डॉलर है।
मनमोहन सिंह की मास्को यात्रा की समाप्ति पर दोनों देशों द्वारा संयुक्त रूप से जारी वक्तव्य में ब्रिक्स देशों के बीच प्रत्येक पहलू पर बहुपक्षीय सहयोग स्थापित करने के महत्व पर विशेष बल दिया गया।
दक्षिण अफ्रीका में ब्रिक्स देशों के पांचवें शिखर सम्मेलन में की गई कुछ नई पहल पर सभी सदस्य देशों ने सहमति व्यक्त की थी, जिसमें 50 अरब डॉलर की प्रारंभिक पूंजी के साथ एक नया विकास बैंक स्थापित करना एवं 100 अरब डॉलर की आपात संरक्षण व्यवस्था शामिल थी।
भारत और रूस ने विश्वास व्यक्त किया है कि ब्राजील में होने वाला ब्रिक्स का आगामी शिखर सम्मेलन अंतरराष्ट्रीय मंच पर ब्रिक्स की भूमिका को मजबूती प्रदान करेगा।
ब्रिक्स देशों द्वारा तय किए लक्ष्यों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इन देशों की स्थिति को क्रमिक तौर पर सुदृढ़ करना, वैश्विक अर्थव्यवस्था और वैश्विक वित्त के प्रबंधन में सत्ता के परंपरागत केंद्रों के साथ साझेदारी सुनिश्चित करना और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय एवं आर्थिक संस्थानों के साथ निकट संपर्क स्थापित करना शामिल है।
मनमोहन सिंह और पुतिन के बीच हुई बैठक में एशिया प्रशांत आर्थिक सहभागी (एपेक) मंच की भूमिका पर भी चर्चा की गई। दोनों देशों ने एशिया प्रशांत क्षेत्र में व्यापारिक एवं निवेश सहयोग और क्षेत्रीय एकता विकसित करने में एपेक की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
रूस ने एपेक की सदस्यता के लिए भारत के प्रति अपने समर्थन को दोहराया और कहा कि भारत को एपेक की सदस्यता प्रदान कर क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों को कहीं बेहतर तरीके से संबोधित किया जा सकता है।