खास बातें
- विनिर्माण व खनन क्षेत्र के कमजोर प्रदर्शन से वित्त वर्ष 2010-11 में औद्योगिक उत्पादन वृद्धि की रफ्तार धीमी पड़कर 7.8 प्रतिशत रह गई।
New Delhi: विनिर्माण व खनन क्षेत्र के कमजोर प्रदर्शन से वित्त वर्ष 2010-11 में औद्योगिक उत्पादन वृद्धि की रफ्तार धीमी पड़कर 7.8 प्रतिशत रह गई हालांकि मार्च महीने आंकड़ों में आए सुधार को देखते हुए सरकार को हालात में 'बदलाव' की उम्मीद बंधी है। देश में कारखानों से होने वाले कुल उत्पादन को औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) के रूप में आंका जाता है। इसकी वृद्धि दर बीते वित्त वर्ष 2010-11 में 7.8 प्रतिशत रही जो 2009-10 में 10.5 प्रतिशत रही थी। बृहस्पतिवार को जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार अकेले मार्च महीने में औद्योगिक उत्पादन वृद्धि 7.3 प्रतिशत रही है। एक महीना पहले की तुलना में इसमें सुधार आया है क्योंकि फरवरी 2011 में यह 3.6 प्रतिशत थी। मार्च का प्रदर्शन अक्तूबर 2010 के बाद का सबसे बेहतर रहा है। वित्तमंत्री प्रणव मुखर्जी ने आईआईपी के मार्च के आंकड़ों को 'हालात में बदलाव' बताते हुए कहा है कि चार महीने की धीमी वृद्धि के बाद औद्योगिक क्षेत्र से इस तरह के प्रदर्शन की उम्मीद थी, इसको लेकर पूरी तरह नाउम्मीदी नहीं थीं। मुखर्जी ने संवाददाताओं से कहा, आंकड़ों में कुछ सुधार हुआ है। मुझे कुछ और अधिक की अपेक्षा थी लेकिन जो भी तथ्य है हम उसे स्वीकार करेंगे। उन्होंने कहा कि सालाना वृद्धि दर कुछ और अधिक होनी चाहिए थी। उल्लेखनीय है कि नवंबर से लेकर चार महीने तक कारखाना उत्पादन बहुत ही कम रहा है। इसमें वृद्धि दर नवंबर में 2.7 प्रतिशत, दिसंबर में 1.6 प्रतिशत, जनवरी में 3.95 प्रतिशत तथा फरवरी में 3.6 प्रतिशत रही। विनिर्माण क्षेत्र के खराब प्रदर्शन के कारण इन महीनों में आईपीपी का प्रदर्शन खराब रहा। आईआईपी में विनिर्माण क्षेत्र का हिस्सा लगभग 80 प्रतिशत है। मार्च से पहले अक्तूबर 2010 में आईआईपी 11.29 प्रतिशत के प्रभावी स्तर पर रहा है। वित्तमंत्री के मुख्य आर्थिक सलाहकार कौशिक बसु ने मार्च में आईआईपी संख्या में आए सुधार पर संतुष्टि जताई है। बसु ने कहा, इन आंकड़ों के देखने के बाद मैं कुछ अच्छा महसूस कर रहा हूं। चार महीने के खराब प्रदर्शन के बाद औद्योगिक उत्पादन में बदलाव आया है। वहीं योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह आहलूवालिया ने कहा, 7.8 प्रतिशत कोई बड़ा आश्चर्य नहीं है। कुल मिलाकर यह वही है जिसकी हम अपेक्षा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि मासिक आंकड़ों में महत्वपूर्ण सुधार है। आंकड़ों के अनुसार खनन क्षेत्र की वृद्धि दर भी वित्तवर्ष 2010-11 में घटकर 5.9 प्रतिशत पर आ गयी, जो पिछले वित्तवर्ष में 9.9 प्रतिशत थी। मार्च 2011 में इस क्षेत्र का प्रदर्शन काफी खराब रहा। मार्च में क्षेत्र में मात्र 0.2 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई, जो पिछले साल इसी माह में 12.3 प्रतिशत रही थी। वित्तवर्ष 2010-11 में पूंजीगत सामानों के क्षेत्र में सबसे ज्यादा असर रहा है। वर्ष के दौरान इस क्षेत्र की वृद्धि 9.3 प्रतिशत रही, जबकि एक साल पहले यह 20.9 रही प्रतिशत थी। मार्च 2011 में पूंजीगत सामान की उत्पादन वृद्धि 12.9 प्रतिशत रही जबकि पिछले साल मार्च में यह 36 प्रतिशत रही थी। वित्तवर्ष 2010-11 में बिजली क्षेत्र की उत्पादन वृद्धि दर 5.6 प्रतिशत रही, जो पिछले वित्तवर्ष में छह प्रतिशत थी। मार्च महीने में विद्युत उत्पादन में 7.2 प्रतिशत वृद्धि रही जबकि पिछले वर्ष मार्च में क्षेत्र की वृद्धि दर 8.3 प्रतिशत रही थी। कुल मिलाकर औद्योगिक उत्पादन में शामिल 17 में से 13 क्षेत्रों का प्रदर्शन मार्च 2011 में सकारात्मक रहा। इसी प्रकार त्वरित उपभोग वाले उपभोक्ता सामान की उत्पादन वृद्धि दर वित्तवर्ष 2010-11 में 2.2 प्रतिशत रही जो कि पिछले वित्तवर्ष में 0.4 प्रतिशत पर थी। टिकाऊ उपभोक्ता सामान की वृद्धि दर सालाना आधार पर 20.9 प्रतिशत रही, जो इससे पिछले वित्तवर्ष 2009-10 में 24.6 प्रतिशत थी।