यह ख़बर 18 अप्रैल, 2012 को प्रकाशित हुई थी

ऊंची वृद्धि दर के लिए भारत को सुधारों की गति बढ़ानी होगी : आईएमएफ

खास बातें

  • आईएमएफ ने कहा कि भारत को अपनी आर्थिक वृद्धि की पूरी क्षमता को हासिल करने के लिए आर्थिक सुधारों की रफ्तार बढ़ानी होगी। आईएमएफ ने हालांकि भारत में महंगाई की ऊंची दर पर चिंता जताई है।
वाशिंगटन:

अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) ने बुधवार को कहा कि भारत को अपनी आर्थिक वृद्धि की पूरी क्षमता को हासिल करने के लिए आर्थिक सुधारों की रफ्तार बढ़ानी होगी। आईएमएफ ने हालांकि भारत में महंगाई की ऊंची दर पर चिंता जताई है।

भारत के साथ विचार विमर्श के बाद आईएमएफ ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक को महंगाई को और बढ़ने से रोकने के लिए दरों में बढ़ोतरी के लिए तैयार रहना चाहिए। आईएमएफ का यह बयान ऐसे समय आया है जब एक दिन पहले ही केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरों में आधा प्रतिशत की कटौती है। भारत सरकार के साथ सालाना विचार विमर्श (जिसे अनुच्छेद चार का विचार विमर्श भी कहा जाता है) के बाद आईएमएफ ने कहा, ‘‘एक प्रमुख चुनौती वृद्धि दर को उसकी पूरी क्षमता पर लाने और उसका लाभ सभी को पहुंचाने की है। इसके साथ ही महंगाई की दर को भी नीचे लाना होगा। इसके लिए आर्थिक सुधारों और वित्तीय मजबूती की जरूरत होगी।’’

भारत की अर्थव्यवस्था 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट से पहले तक 9 प्रतिशत की दर से बढ़ रही थी। 2008-09 में यह घटकर 6.7 प्रतिशत पर आ गई। 2011-12 में यह तीन साल के निचले स्तर 6.9 प्रतिशत पर आ गई।

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आईएमएफ ने कहा, ‘‘आर्थिक वृद्धि के नीचे की ओर जाने का जोखिम कायम है। घरेलू मोर्चे पर मुख्य जोखिम निजी निवेश में और कमी आने का है। यदि सरकारी मंजूरियों की रफ्तार नहीं बढ़ती, सुधार के प्रयास तेज नहीं होते और मुद्रास्फीति ऊंची बनी रहती है, तो ऐसी स्थिति बन सकती है।