नई दिल्ली: वैसे तो आपकी सैलरी का ब्रेक-अप (वेतन के विभिन्न मद) आपके नियोक्ता ही तय करते हैं, लेकिन कई कंपनियां ऐसी भी हैं, जो अब कर्मचारियों को अपने ब्रेक-अप खुद तय करने का विकल्प देती हैं. इस तरह कर्मचारी अपने वेतन के विभिन्न मदों में बदलाव कर अपनी इन-हैंड सैलरी बढ़ा सकते हैं और साथ ही कर दायित्व को भी कम कर सकते हैं.
मकान किराया भत्ता (एचआरए)
किराये के मकानों में रहने वाले कर्मचारी टैक्स बचाने के लिए एचआरए का दावा कर सकते हैं. इस पर आंशिक टैक्स छूट मिलता है. अगर आप किराये के मकान में रह रहे हैं और साथ ही किसी अन्य मकान के लिए होम लोन ले रखा है, तो आप एचआरए और होम लोन की किश्तों के भुगतान, दोनों पर आयकर छूट हासिल कर सकते हैं. अगर ये दोनों ही मकान एक ही शहर में हैं, तब भी आप दोनों पर टैक्स छूट हासिल कर सकते हैं. हालांकि इसके लिए कुछ शर्तें रखी गई हैं.
अगर आप अपने माता-पिता के घर में रहने के लिए किराया देते हैं, तब भी आप एचआरए छूट का दावा कर सकते हैं. हालांकि इसके लिए वह मकान आपके परिजनों के नाम पर ही होनी चाहिए और उन्हें इससे मिलने वाले किराये को अपनी आय में दिखाना होगी.
अवकास यात्रा भत्ता (एलटीए)
अगर छुट्टियों के लिए यात्रा भत्ता (एलटीए) आपके वेतन का हिस्सा है, तो आप इस भत्ते से टैक्स में छूट हासिल कर सकते हैं. लेकिन याद रखें कि एलटीए देश के भीतर यात्रा पर ही लागू होता है. हर कर्मचारी को यह चार कैलेंडर वर्ष (जनवरी-दिसंबर) में दो यात्राओं के लिए ही मिलता है.
राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस)
कॉर्पोरेट मॉडल के तहत, राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) में नियोक्ताओं के योगदान पर टैक्स छूट मिलती है. एनपीएस में नियोक्ता द्वारा कर्मचारियों के बेसिक (आधार वेतन) और डीए (महंगाई भत्ता) के योग के 10 फीसदी तक के योगदान पर सेक्शन 80CCD (2) के तहत छूट मिलती है, जो सेक्शन 80C में तय 1.5 लाख रुपये की सीमा और 80CCD (1B) के तहत मंजूर एनपीएस में 50,000 रुपये के स्व-योगदान (सेल्फ कॉन्ट्रीब्यूशन) के अतिरिक्त है.
बोनस
नियोक्ता से मिलने वाला बोनस पूरी तरह टैक्स योग्य है. हालांकि कई मामलों में, नियोक्ता कर्मचारियों को बोनस देने से पहले ही उस पर टैक्स काट लेते हैं. इस हालत में, कर्मचारी अपने टैक्स-बचत निवेश का विवरण नियोक्ता को दे सकते हैं, जिससे उनके बोनस पर टैक्स नहीं कटेगा और उन्हें अधिकतम बोनस हाथ में मिल सकेगा. वहीं अगर आप ऐसा नहीं कर पाए हैं, तो टैक्स रिटर्न फाइल करने के वक्त आप टैक्स रिफंड का दावा कर सकते हैं.
रीइम्बर्स्मेंट्स
कर्मचारी अगर किताब- अखबार के खर्चे, टेलीफोन बिल, कार के पेट्रोल व ड्राइवर के वेतन, फूड कूपन जैसे खर्चों के लिए रीइम्बर्स्मेंट्स को वेतन मद के तौर पर क्लेम करते हैं, तो उनका टैक्स दायित्व काफी कम हो सकता है.
एडवांस सैलरी/ लोन
एडवांस सैलरी पर उसी साल टैक्स देय होता है, जब यह ली गई है. यह कर्मचारी के आय में दोबारा शामिल नहीं की जाती. उन मामलों में जहां नियोक्ता ब्याज रहित (टैक्स फ्री) या रियायती कर्ज देते हैं, तो उसे सुविधा के तौर पर देखा जाता है और उस पर टैक्स देय होता है. हालांकि किसी खास बीमारी के इलाज के लिए और 20,000 रुपये से कम एडवांस सैलरी लिए जाने पर टैक्स नहीं लगेगा. टैक्स कानून के तहत, इस पर लगने वाला ब्याज स्टेट बैंक ऑफ की दरों के हिसाब से जोड़ा जाएगा और कर्मचारी को मिलने वाला टैक्स लाभ उनके वेतन में शामिल माना जाएगा और उस पूरी राशि पर टैक्स लगेगा.
कर्मचारी शेयर विकल्प योजना (ईएसओपी)
कई कंपनियां कर्मचारियों को जोड़े रखने के लिए कर्मचारी शेयर विकल्प योजना (ईएसओपी) के तहत उन्हें शेयर दे देते हैं. हालांकि ये ईएसओपी पूरी तरह से टैक्स देय होते हैं. एक बार ईएसओपी तय होने पर कर्मचारी उन्हें कम कीमत पर खरीद सकते हैं, जो कि अकसर उस शेयर के उचित बाजार मूल्य (एफएमवी) से कम होता है. ईएसओपी पर लगने वाला टैक्स शेयर खरीद के दिन इन पर खर्च किए गए पैसे और उनके 'उचित बाजार मूल्य' के अंतर पर लगता है. कर्मचारी इसके लिए ऐसे वक्त तक रुक सकते हैं, जब स्टॉक का 'उचित बाजार मूल्य' न्यूनतम हो. हालांकि इसका अनुमान लगा पाना खासा मुश्किल है.