यह ख़बर 19 मार्च, 2012 को प्रकाशित हुई थी

माइक्रोसाफ्ट के खिलाफ आपराधिक मामला चलाने का फैसला पलटा

खास बातें

  • दिल्ली उच्च न्यायालय ने माइक्रोसाफ्ट इंडिया के खिलाफ आपराधिक मामला चलाने के सुनवाई अदालत के फैसले को खारिज कर दिया।
नई दिल्ली:

दिल्ली उच्च न्यायालय ने माइक्रोसाफ्ट इंडिया के खिलाफ आपराधिक मामला चलाने के सुनवाई अदालत के फैसले को खारिज कर दिया।

उल्लेखनीय है कि माइक्रासाफ्ट सहित 21 साइटों पर आपत्तिजनक सामग्री की प्रस्तुति के खिलाफ दिल्ली की एक निचली अदालत ने आपराधिक कानून की घाराओं के तहत सुनवाई के लिए सम्मन जारी किए थे।

न्यायमूर्ति सुरेश केत ने सुनवाई अदालत के वेबसाईट के खिलाफ आपाराधिक मामला चलाने के सुनवाई अदालत के फैसले को खारिज कर दिया।

उच्च न्यायालय ने शिकायतकर्ता विनय राय से भी कहा कि यदि उन्हें वेबसाईट के खिलाफ कोई विश्वसनीय सबूत मिले तो वह नयी शिकायत दायर कर सकते हैं।

माइक्रोसाफ्ट ने निचली अदालत की कार्रवाई के खिलाफ उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। इसी पर न्यायमूर्ति केत ने यह फैसला सुनाया।

अपनी याचिका में प्रमुख साफ्टवेयर कंपनी ने कहा कि वह लोगों को विचारों के आदान-प्रदान या प्रकाशित करने का कोई मौका नहीं मुहैया करा रही है बल्कि वह सिर्फ साफ्टवेयर व कंप्यूटर से जुड़े समाधान के विकास और बिक्री का काम करती है।

माईक्रासाफ्ट के वकील ने अदाल से कहा कि उसकी वेबसाईट पर कोई 5ी आपत्तिजनक सामग्री नहीं थी।

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विनय राय ने माइक्रोसाफ्ट, फेसबुक, गूगल, याहू और यूट्यूब समेत 21 वेबसाईट पर कथित तौर पर आपत्तिजनक सामग्री हटाने की याचिका दायर की। इनमें 12 वेबसाईट विदेशी हैं।