वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि जीएसटी लागू करने के लिए 1 जुलाई की समय सीमा संभव दिखती है
खास बातें
- केंद्रीय जीएसटी, एकीकृत जीएसटी कानून का अंतिम मसौदा का मंजूर
- राज्य जीएसटी के मसौदे को भी जल्द मंजूरी मिलने वाली है- जेटली
- राज्यों ने 26 बदलाव की मांग की, जिसे केंद्र ने मंजूर कर लिया-अमित मित्रा
नई दिल्ली: देश के सबसे बड़े टैक्स सुधार माने जाने वाले जीएसटी के 1 जुलाई से लागू होने की उम्मीदें बन रही हैं. जीएसटी परिषद की शनिवार को हुई बैठक में इस नई अप्रत्यक्ष कर प्रणाली के लिए प्रस्तावित दो प्रमुख विधेयकों- केंद्रीय जीएसटी (सीजीएसटी) और एकीकृत जीएसटी (आईजीएसटी) कानून के अंतिम मसौदे को मंजूरी दी. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि राज्य जीएसटी (एसजीएसटी) के मसौदे को मंजूरी भी जल्दी मिलने वाली है. यह विधेयक राज्यों की विधानसभाओं द्वारा अनुमोदित किया जाएगा.
एसजीएसटी के साथ यूटी-जीएसटी, सीजीएसटी विधेयक की तर्ज पर होगा और जीएसटी परिषद 16 मार्च को बैठक में इस पर विचार करेगी. जेटली ने बताया कि सीजीएसटी, आईजीएसटी और यूटी-जीएसटी कानून को 9 मार्च से शुरू होने वाले बजट सत्र के दूसरे चरण में संसद में रखा जाएगा. उन्होंने कहा कि जीएसटी लागू करने के लिए 1 जुलाई की सीमा संभव दिखती है. उन्होंने यह भी कहा कि शिखर दर अपेक्षाकृत ऊंची रखी जाएगी, लेकिन लागू की जाने वाली दरें 5,12, 18 और 28 ही रहेगी.
सीजीएसटी केंद्र को उत्पाद शुल्क एवं सेवा कर के जीएसटी में समाहित होने के बाद वस्तुओं एवं सेवाओं पर जीएसटी लगाने का अधिकार देगा. वहीं आईजीएसटी अंतर-राज्यीय बिक्री पर लागू होगा. राज्य जीएसटी विधेयक को प्रत्येक राज्य की विधानसभा में पारित कराना होगा. वहीं यूटी-जीएसटी मंजूरी के लिए संसद में रखा जाएगा. वैट और राज्य में लगने वाले अन्य टैक्सों के जीएसटी में शामिल होने के बाद एस-जीएसटी राज्यों को टैक्स लगाने की अनुमति देगा.
जेटली ने कहा कि मॉडल जीएसटी कानून में वस्तु एवं सेवा कर की शिखर दर को 40 प्रतिशत तक (20 प्रतिशत केंद्र और उतना ही राज्यों द्वारा) किए जाने की व्यवस्था की जाएगी, लेकिन जीएसटी की प्रभावी दरों को पहले से मंजूर 5, 12, 18 और 28 प्रतिशत पर ही रखा जाएगा.
वहीं, पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री अमित मित्रा ने कहा कि राज्यों ने 26 बदलाव की मांग की थी, जिसे केंद्र ने स्वीकार कर लिया है. यह भारत की संघीय व्यवस्था का गुण प्रदर्शित करता है. मित्रा ने आगे कहा कि केंद्र तथा राज्य सरकारें ढाबा और छोटे रेस्तरां कारोबारियों के लिए एक निपटान योजना रखने पर सहमत हुए हैं.
उन्होंने कहा कि राज्य यह मांग कर रहे थे कि ढाबा और छोटे रेस्तरां निपटारा योजना अपना सकते हैं. केंद्र इस पर सहमत हो गया है कि इन छोटे कारोबारी पर 5 प्रतिशत टैक्स लगेगा और यह केंद्र एवं राज्यों के बीच बराबर बांटा जाएगा. दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि परिषद की बैठक में केंद्रीय जीएसटी तथा एकीकृत जीएसटी विधेयकों पर व्यापक रूप से सहमति रही. (इनपुट एजेंसियों से)