यह ख़बर 16 अक्टूबर, 2014 को प्रकाशित हुई थी

विकास दर में अगले दो साल में आएगी तेजी : फिच

नई दिल्ली:

अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी फिच ने गुरुवार को कहा कि अगले दो साल में देश की आर्थिक गतिविधि में तेजी आने की उम्मीद है और इससे विकास दर बढ़ सकती है।

अमेरिकी निवेशकों द्वारा उभरते बाजारों के बैंकों के वित्तीय स्वास्थ्य के बारे में पूछे जाने पर फिच ने यह बयान दिया है।

फिच ने कहा, "(भारतीय) बैंकिंग प्रणाली के समक्ष दो प्रमुख चुनौतियां हैं-संपत्ति की गुणवत्ता और पूंजीकरण और सबसे बड़ा मुद्दा सरकारी बैंकों के साथ है।"

एजेंसी के मुताबिक, भारत में आर्थिक तेजी का लाभ उठाने के लिए निजी क्षेत्र के बैंक बेहतर स्थिति में हैं, क्योंकि उनकी संपत्ति की गुणवत्ता अपेक्षाकृत बेहतर है और समुचित पूंजीकरण है। साथ ही उनका कारोबार अधिक व्यापक है।

सरकारी बैंकों में फिच के मुताबिक भारतीय स्टेट बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा को देश के बेहतर आर्थिक माहौल को बेहतर लाभ उठा सकते हैं।

फिच के अनुसार, बैंकों की संपत्ति का एक बड़ा हिस्सा तनावपूर्ण है। इसके अंतर्गत गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां और सरलीकृत कर्ज आते हैं।

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फिच ने कहा कि मार्च 2014 के आखिर तक सरकारी बैंकों की करीब 12 फीसदी संपत्ति तनावपूर्ण थी, जबकि निजी बैंकों के मामले में यह चार फीसदी और समग्र बैंकिंग प्रणाली के लिए यह 10 फीसदी थी।