केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) द्वारा यहां जारी आंकड़ों के मुताबिक जुलाई-सितंबर तिमाही में कृषि विकास दर 4.6 फीसदी रही, जबकि विनिर्माण क्षेत्र की विकास दर मामूली एक फीसद रही।
लगातार चौथी तिमाही में विकास दर पांच फीसदी से कम दर्ज की गई है। पहली तिमाही में विकास दर 4.4 फीसद दर्ज की गई थी। मौजूदा कारोबारी साल की पहली छमाही में आर्थिक विकास दर 4.6 फीसदी दर्ज की गई।
आलोच्य तिमाही में कृषि, वानिकी और मत्स्य क्षेत्र की विकास दर 4.6 फीसदी, बिजली, गैस और जलापूर्ति क्षेत्र में विकास दर 7.7 फीसदी, निर्माण विकास दर 4.3 फीसदी, वित्तीय, बीमा, रियल एस्टेट और व्यावसायिक सेवा क्षेत्र की विकास दर 10 फीसदी और सामुदायिक, सामाजिक तथा व्यक्तिगत सेवा क्षेत्र में विकास दर 4.2 फीसदी रही।
दूसरी तिमाही में खनन क्षेत्र में 0.4 फीसदी गिरावट रही, जबकि व्यापार, होटल, परिवहन, संचार क्षेत्र में साल-दर-साल आधार पर चार फीसदी विकास दर्ज की गई।
फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) की अध्यक्ष नैना लाल किदवई ने आंकड़ा बाजार के अनुमान से बेहतर है।
किदवई ने कहा, "यह खुशी की बात है कि वास्तविक आंकड़ा अनुमान से बेहतर है। उम्मीद है कि आगे भी यह रुझान बरकरार रहेगा।"
सरकार का अनुमान है कि मौजूदा कारोबारी साल में विकास दर 5-5.5 फीसदी के दायरे में रहेगी। भारतीय रिजर्व बैंक ने विकास दर के पांच फीसदी रहने का अनुमान जताया है।
कई अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने हालांकि विकास दर के पांच फीसदी से काफी कम रहने का अनुमान जताया है।
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के मुताबिक विकास दर 3.75 फीसदी और विश्व बैंक के अनुसार यह 4.7 फीसदी रहेगी।
भारतीय उद्योग परिसंघ के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा, "लगातार चार तिमाही में विकास दर के पांच फीसदी से कम रहना चिंता की बात है।" उन्होंने कहा कि बेहतर मानसून और बेहतर निर्यात के बाद भी विकास दर बेहतर नहीं हो पा रही है क्योंकि खनन, विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों का प्रदर्शन बेहतर नहीं है।
बनर्जी ने कहा, "निवेश और मांग में कमी और उच्च महंगाई दर के कारण विकास दर प्रभावित हो रही है।"