खास बातें
- देश-दुनिया के कठिन हालात को देखते हुए सरकार ने चालू वित्त वर्ष में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि का अनुमान घटा कर 7.5 फीसद किया।
New Delhi: देश-दुनिया के कठिन हालात को देखते हुए सरकार ने चालू वित्त वर्ष में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि का अनुमान घटा कर 7.5 फीसदी किया जबकि इस बार का बजट पेश करते समय इसके 9 प्रतिशत तक रहने का अनुमान लागया गया था। सरकार को भरोसा है कि अगले साल आर्थिक वृद्धि सुधरेगी। आज संसद में पेश 2011-12 की छमाही आर्थिक समीक्षा में कहा गया है, कई आंकड़ों की श्रृंखलाओं और सामान्य वृहद् आर्थिक मॉडल के विश्लेषण के आधार पर 2011-12 के दौरान सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर 7.5 फीसद (0.25 फीसद की कमी और अधिकता के साथ) रहने का अनुमान लगाया गया है। सरकार ने कहा कि औद्योगिक वृद्धि में कमी जैसे घरेलू कारकों के साथ वैश्विक स्थिति के कारण 2011-12 की पहली छमाही में वृद्धि दर स्पष्ट रूप से सालाना स्तर पर 8.6 फीसदी से घटकर 7.3 फीसद पर आ गई। समीक्षा में कहा गया, हमें अगले साल इसमें थोड़े सुधार की उम्मीद है कि लेकिन दृष्टिकोण मिश्रित है। यदि यूरोप शुद्ध रूप में मंदी में पड़ जाता है तो निस्संदेह अन्य देश प्रभावित होंगे, पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था में नरमी आएगी और हम भी प्रभावित हो सकते हैं। इस विश्लेषण में हालांकि यह कहा गया कि यदि यूरो और अमेरिका स्थिर रहता है तो भारत अपनी मजबूत बुनियाद के साथ संभव है कि भारत लंबे समय में नौ फीसद की वृद्धि दर हासिल कर ले। उच्च मुद्रास्फीति के बारे में सरकार को उम्मीद है कि वित्तीय सहायता वापस लिए जाने और ब्याज दरों में बढ़ोतरी के बाद मांग पर बढ़ा दबाव हो रहा है और सकल मुद्रास्फीति दिसंबर से कम होने लगेगी। समीक्षा में कहा गया, चालू वित्त वर्ष के अंत तक सकल मुद्रास्फीति सात फीसद के करीब होगी। वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी द्वारा लोकसभा में पेश विश्लेषण में कहा गया, मूल्य में स्थिरता के साथ अर्थव्यवस्था की वृद्धि की रफ्तार को बरकरार रखना भारत की सबसे बड़ी मौजूदा नीतिगत चुनौतियों में से एक है।