यह ख़बर 05 जुलाई, 2012 को प्रकाशित हुई थी

बैंक बचत खाते पर ब्याज दर आकर्षक बनाएं : रिजर्व बैंक

खास बातें

  • बचत खाते पर ब्याज दरों को नियंत्रणमुक्त करने के बाद रिजर्व बैंक का मानना है कि बड़े बैंकों को भी छोटे बैंकों की तरह बचत खाते पर ब्याज दरों को ग्राहकों के लिए आकर्षक बनाना चाहिए।
चेन्नई:

बचत खाते पर ब्याज दरों को नियंत्रणमुक्त करने के बाद रिजर्व बैंक का मानना है कि बड़े बैंकों को भी छोटे बैंकों की तरह बचत खाते पर ब्याज दरों को ग्राहकों के लिए आकर्षक बनाना चाहिए।

रिजर्व बैंक ने पिछले साल बचत खाते पर ब्याज दर को नियंत्रणमुक्त कर दिया था। उसके बाद निजी क्षेत्र के कई छोटे बैंकों ने बचत खाते पर ऊंचा ब्याज देना शुरु किया, लेकिन सार्वजनिक क्षेत्र के बड़े बैंकों ने इसमें ज्यादा बदलाव नहीं किया।

रिजर्व बैंक गवर्नर डी सुब्बाराव ने बुधवार को चेन्नई में कहा कि बचत खाते पर ब्याज दरों को नियंत्रणमुक्त किए जाने के बाद निजी क्षेत्र के छोटे बैंकों ने दरों को बढ़ाया है और इसका उन्हें फायदा भी मिला है। इस श्रेणी में उनका हिस्सेदारी बढ़ी है।

सुब्बाराव ने कहा ‘बड़े बैंकों ने इस दिशा में अभी तक ज्यादा कुछ नहीं किया। रिजर्व बैंक बचत बैंक खाते के वर्ग में और अधिक सक्रिय गतिविधियां देखना चाहता है। निम्न आयवर्ग के परिवार जो कि वर्तमान में बैंकिंग क्षेत्र की पहुंच से बाहर हैं, उन्हें आकर्षित करने के लिए ग्राहकों के अनुकूल कुछ नवीन प्रयास होने चाहिए।’

सुब्बाराव ने यहां इंडियन ओवरसीज बैंक की प्लेटिनम जुबली के अवसर पर आयोजित व्याख्यान कार्यक्रम में यह बात कही। रिजर्व बैंक ने बचत खाते पर ब्याज दरों को नियंत्रणमुक्त करते हुये कहा था कि एक लाख रुपये तक की बचत पर बैंकों में समान ब्याज दर होनी चाहिये जबकि एक लाख से अधिक की जमा पर बैंक प्रतिस्पर्धी ब्याज एवं शुल्क रख सकते हैं।

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बड़े बैंकों में वर्तमान में बचत खाते पर चार प्रतिशत ब्याज दर है जबकि निजी क्षेत्र के कई बैंकों ने बचत खाते पर छह से सात प्रतिशत तक ब्याज देना शुरू किया है।