फ्यूचर रिटेल मामला: सुप्रीम कोर्ट ने NPA घोषित करने के खिलाफ नहीं दी अंतरिम राहत 

फ्यूचर रिटेल ने बातचीत के जरिए कर्जदाताओं के साथ समाधान निकालने के लिए सुप्रीम कोर्ट से समय मांगा था. 10 निजी बैंकों सहित 27 बैंकों के कंसोर्टियम का फ्यूचर रिटेल पर 17000 करोड़ का कर्ज है. 

फ्यूचर रिटेल मामला: सुप्रीम कोर्ट ने NPA घोषित करने के खिलाफ नहीं दी अंतरिम राहत 

बैंकों ने विवाद सुलझाने के लिए अमेज़न, रिलायंस के बीच खुली बोली का सुझाव दिया है. (फाइल फोटो)

नई दिल्‍ली :

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने बैंकों को फ्यूचर रिटेल (Future Retail) को NPA (नॉन परफार्मिंग एसेट) घोषित करने के खिलाफ अंतरिम आदेश पारित करने से इनकार किया है. फ्यूचर रिटेल ने बातचीत के जरिए कर्जदाताओं के साथ समाधान निकालने के लिए सुप्रीम कोर्ट से समय मांगा था. 10 निजी बैंकों सहित 27 बैंकों के कंसोर्टियम का फ्यूचर रिटेल पर 17000 करोड़ का कर्ज है. बैंकों ने विवाद सुलझाने, बैंकों की वसूली सुनिश्चित करने के लिए अमेज़न, रिलायंस के बीच एक खुली बोली लगाने का सुझाव दिया है. बैंकों ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि अमेजन के मुद्दे और बैंकों द्वारा दावा किए गए बकाया के बीच कोई संबंध नहीं है. फ्यूचर के साथ उधारदाताओं का अनुबंध केवल एक ही है, जिसमें जमाकर्ताओं का पैसा शामिल है. 

उन्‍होंने कहा कि हमारे पास फ्यूचर रिटेल का एक्सपोजर 17,000 करोड़ है, अगर इसे एक साल आगे बढ़ाया जाए तो यह बढ़कर 25,000 करोड़ हो जाएगा. फ्यूचर रिटेल की पूरी संपत्ति जिसे हम बेचने के हकदार हैं, उन्हें खुली बोली के अधीन किया जा सकता है.  इन लोगों के पास धन की कमी है तो मध्यस्थता, मुकदमेबाजी क्यों ? अमेज़न और फ्यूचर रिटेल को खुली बोली के लिए सहमत होना चाहिए. 

सुप्रीम कोर्ट ने फ्यूचर रिटेल को रिलायंस डील के लिए नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्‍यूनल की मंजूरी के साथ आगे बढ़ने की अनुमति देने पर आदेश सुरक्षित रखा है. फ्यूचर रिटेल ने सौदे के लिए मंजूरी हासिल करने के लिए आगे बढ़ने की अनुमति मांगी है और कहा कि कोई अंतिम आदेश पारित नहीं किया जा सकता. 

फ्यूचर रिटेल की NPA घोषित करने से रोक की याचिका पर SC सुनवाई को तैयार, आरबीआई और बैंकों से मांगा जवाब

इससे पहले फ्यूचर रिटेल लिमिटेड की NPA घोषित करने से रोक की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई को तैयार हो गया था. सुप्रीम कोर्ट ने फ्यूचर रिटेल की याचिका पर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया और बैंकों से जवाब मांगा था. सुनवाई के दौरान बैंकों ने फ्यूचर की याचिका का विरोध किया था और कहा था कि फ्यूचर पहले से ही डिफॉल्ट में है. मध्यस्थता सुरक्षित उधारदाताओं के अधिकारों को प्रभावित नहीं करती है. 

सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की कि इस मुद्दे को हल करने के लिए बैंकों को यथार्थवादी दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है. दरअसल, फ्यूचर रिटेल ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. फ्यूचर रिटेल ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है कि कंपनी को NPA या डिफॉल्टर घोषित करने से रोका जाए. दरअसल, इस महीने की शुरुआत में फ्यूचर रिटेल ने कहा था कि वह बैंकों और कर्जदाताओं को तय तारीख पर 3,494.56 करोड़ रुपये की अदायगी नहीं कर सकी क्योंकि अमेजन के साथ चल रहे मुकदमे के कारण कंपनी संपत्ति नहीं बेच सकी है. उक्त राशि का भुगतान अब इस महीने के अंत तक किया जाना है. 

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फ्यूचर रिटेल ने कर्ज अदा करने के लिए कुछ और समय मांगा है और न्यायालय से अनुरोध किया कि छोटे आकार की दुकानों के मौद्रिकरण के लिए मसौदा समझौते के तहत निर्धारित समयसीमा को दिनांक 01.01.2022 की बैठक के अनुसार बढ़ाया जाए. फ्यूचर रिटेल लिमिटेड द्वारा देय तिथि (31 दिसंबर, 2021) तक कर्ज नहीं चुकाने पर कर्जदाताओं ने उसे कोविड-19 से प्रभावित कंपनियों के लिए एकमुश्त पुर्नगठन (ओटीआर) योजना के तहत 30 दिन का अतिरिक्त समय दिया है. फ्यूचर रिटेल लिमिटेड ने पिछले साल बैंकों और कर्जदाताओं के एक संघ के साथ ओटीआर योजना में प्रवेश किया था और इसके तहत उसे 31 दिसंबर, 2021 तक कुल 3,494.56 करोड़ रुपये चुकाने थे.