यह ख़बर 18 जनवरी, 2013 को प्रकाशित हुई थी

कर्ज सस्ता किए जाने का ठोस संदेश दे रिजर्व बैंक : फिक्की अध्यक्ष

खास बातें

  • देश के प्रमुख वाणिज्य एवं उद्योग मंडल फिक्की ने कहा है कि भारतीय रिजर्व बैंक को मौद्रिक नीति की आगामी तिमाही समीक्षा में नीतिगत ब्याज दर में कम से कम 0.25 प्रतिशत कमी कर वाणिज्यिक बैंकों को कर्ज सस्ता सस्ता करने का मजबूत संदेश देना चाहिए।
नई दिल्ली:

देश के प्रमुख वाणिज्य एवं उद्योग मंडल फिक्की ने कहा है कि भारतीय रिजर्व बैंक को मौद्रिक नीति की आगामी तिमाही समीक्षा में नीतिगत ब्याज दर में कम से कम 0.25 प्रतिशत कमी कर वाणिज्यिक बैंकों को कर्ज सस्ता सस्ता करने का मजबूत संदेश देना चाहिए।

रिजर्व बैंक 29 जनवरी को मौद्रिक नीति की समीक्षा करेगा। फिक्की की नवनिर्वाचित अध्यक्ष नैना लाल किदवई ने कहा, नीतिगत दरों में कम से कम 0.25 प्रतिशत की कमी होनी चाहिए और केंद्रीय बैंक को ब्याज दरों में गिरावट की दिशा में मजबूत संदेश देना चाहिए। किदवई वित्तीय सेवा कंपनी एचएसबीसी इंडिया की प्रमुख हैं और उन्होंने हाल में इस उद्योगमंडल का अध्यक्ष पद संभाला है।

किदवई ने कहा कि आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए इस समय सस्ती दर पर नकदी की उपलब्धता जरूरी है। जनवरी में नहीं तो कम से कम इस साल मार्च तक रिजर्व बैंक को नीतिगत ब्याज दरों में कमी लाने का कोई न कोई कदम उठाकर मजबूत संदेश देना चाहिए। किदवई ने यह टिप्पणी रिजर्व बैंक गवर्नर डी. सुब्बाराव के इस वक्तव्य का उल्लेख किए जाने पर की कि रिजर्व बैंक के लिए महंगाई दर पर अंकुश लगाना पहली प्राथमिकता है। दो दिन पहले उत्तर प्रदेश में एक कार्यक्रम कार्यक्रम के दौरान सुब्बाराव की इस टिप्पणी से कयास लगाया जा रहा है कि रिजर्व बैंक शायद अभी ब्याज दर में ढील न दे।

रिजर्व बैंक ने पिछले साल अप्रैल के बाद से रेपो दर में कोई बदलाव नहीं किया है। अप्रैल में वार्षिक मौद्रिक नीति घोषित करते समय रेपो दर 0.50 प्रतिशत घटाकर आठ प्रतिशत की गई थी। तब से यह आठ प्रतिशत पर बरकरार है। तदनुसार रिवर्स रेपो भी सात प्रतिशत पर स्थिर है। उद्योग जगत लगातार ब्याज दरों में की लाने की मांग करता रहा है। रिजर्व बैंक ने हालांकि इस दौरान नकदी बढ़ाने के लिये नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) में दो बार 0.25 प्रतिशत कटौती की।

किदवई ने ऊंची मुद्रास्फीति पर अंकुश लगाने के लिए ‘व्यापक खाद्य नीति’ बनाये जाने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा,  ‘‘खाद्य पदार्थों की बर्बादी रोकनी होगी और उनके बेहतर भंडारण और प्रसंस्करण की व्यवस्था की जानी चाहिए। थोक मूल्य सूचकांक में गिरावट लेकिन खुदरा मुद्रास्फीति दहाई अंक पर पहुंचने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, खाद्य मुद्रास्फीति लगातार ऊंची बनी हुई है। कृषि उत्पादों की खपत भी बढ़ी है, दूसरी तरफ खाद्य तेल का बड़ी मात्रा में आयात हो रहा है, इस पर भी गौर किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा सरकार को विस्तृत खाद्य नीति बनानी चाहिये जिसमें देश में खाद्य तेलों का उत्पादन बढ़ाने पर गौर किया जाना चाहिये। फल एवं सब्जियों की जितनी बर्बादी होती है उसे रोका जाना चाहिये। दाल.दलहन उत्पादन बढ़ाने के उपाय होने चाहिये।

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थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति नवंबर के 7.24 प्रतिशत से घटकर दिसंबर में 7.18 प्रतिशत रह गई, लेकिन खुदरा बाजार की मुद्रास्फीति नवंबर के 9.90 प्रतिशत से बढ़कर दिसंबर में 10.56 प्रतिशत पर पहुंच गई। थोक बाजार के सूचकांक में खाद्य पदार्थों का भारांक काफी कम है, जबकि खुदरा बाजार सूचकांक में खाने-पीने की वस्तुओं का अधिक भारांक है।