खास बातें
- दवा क्षेत्र में एफडीआई की सीमा को लेकर सरकार के भीतर जारी मतभेदों के बीच प्रधानमंत्री द्वारा सोमवार को इस बारे में अपने मंत्रिमंडलीय सहयोगियों के साथ समीक्षा किए जाने की संभावना है।
New Delhi: दवा क्षेत्र में एफडीआई की सीमा को लेकर सरकार के भीतर ही जारी मतभेदों के बीच प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा सोमवार को इस बारे में अपने वरिष्ठ मंत्रिमंडलीय सहयोगियों के साथ समीक्षा किए जाने की संभावना है। सूत्रों ने बताया कि इस मुद्दे पर योजना आयोग के सदस्य अरुण मेड़ा की अध्यक्षता वाली समिति ने अपनी रपट प्रधानमंत्री को सौंप दी है। इस समिति में स्वास्थ्य, उद्योग, विधि तथा वित्त मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल थे और समिति की रपट पर कोई सहमति नहीं बन पाई है। ऐसा माना जाता है कि स्वास्थ्य मंत्रालय ने रपट पर असहमति पत्र देते हुए बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा भारतीय दवा कंपनियों के अधिग्रहण पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने की मांग की है। उल्लेखनीय है कि 2006 के बाद दवा क्षेत्र में विलय एवं अधिग्रहण के अनेक सौदे हुए हैं, जिनमें बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने रेनबेक्सी व पिरामल हेल्थकेयर जैसी घरेलू कंपनियों का अधिग्रहण किया है। सरकार तथा समाज में भी इसको लेकर चिंता है कि इन विलय एवं अधिग्रहण सौदों के कारण जेनरिक दवाओं के दाम बढ़े हैं।