खास बातें
- मल्टी ब्रांड रिटेल क्षेत्र में 51 फीसदी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश से जहां एक ओर रिटेल क्षेत्र का आधुनिकीकरण होगा, वहीं महंगाई दर में भी कमी आएगी।
नई दिल्ली: मल्टी ब्रांड रिटेल क्षेत्र में 51 फीसदी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश से जहां एक ओर रिटेल क्षेत्र का आधुनिकीकरण होगा, वहीं महंगाई दर में भी कमी आएगी। यह मानना है उद्योग जगत के जानकारों और आर्थिक विश्लेषकों का। शुक्रवार को एक सरकारी पैनल द्वारा दिए गए इस सुझाव का स्वागत करते हुए फेडरेशन ऑफ इंडियन चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) के महासचिव राजीव कुमार ने कहा, "यह एक बड़ा फैसला है। हम चाहते हैं कि यह जल्द-से-जल्द शुरू हो।" मंत्रिमंडलीय सचिव अजित कुमार सेठ की अध्यक्षता में सचिवों की एक समिति ने शुक्रवार को सैद्धांतिक तौर पर मल्टी ब्रांड रिटेल क्षेत्र में 51 फीसदी सीमा तक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को मंजूरी दे दी। यदि सरकार इस सुझाव को स्वीकार कर लेती है, तो वाल-मार्ट, केयरफॉर और टेस्को जैसे अंतरराष्ट्रीय रिटेल कारोबारियों के लिए भारत में साझेदारी के माध्यम से प्रवेश करना सम्भव हो जाएगा। कुमार ने कहा कि इनके प्रवेश से भारत के रिटेल क्षेत्र में नयापन आएगा। इसके साथ ही इससे महंगाई दर भी घटेगी, जो आज एक बड़ी समस्या बन गई है। एसोचैम के महासचिव डीएस रावत ने कहा कि इस कदम से न सिर्फ विदेशी निवेशकों, बल्कि भारतीय निवेशकों के बीच भी अच्छा संकेत जाएगा, जो यह मानकर चल रहे थे कि सरकार बड़ा फैसला नहीं ले सकती है। रावत ने कहा, "सरकार ने पिछले कुछ समय से बड़ा फैसला नहीं लिया था। यदि सरकार इस सुझाव को मानती है, तो इसका हर क्षेत्र में बेहतर संकेत जाएगा।" उन्होंने हालांकि कहा कि यह तो सिर्फ पहला कदम है। इसे अभी कई बाधाएं पार करनी है। सचिवों की समिति ने अपना सुझाव मंत्रिमंडलीय समिति को भेज दिया है। अब प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में मंत्रीमंडलीय समिति इस पर विचार करेगी। सरकार के लिए इस पर फैसला लेना कठिन होगा, क्योंकि भारतीय जनता पार्टी सहित अन्य कई विपक्षी पार्टियां यह कहकर इस कदम का विरोध कर रही हैं कि बहुराष्ट्रीय रिटेल कम्पनियां छोटे-मोटे दुकानदारों तथा कारोबारियों को बाजार से खदेड़ देंगी। विश्लेषकों का हालांकि यह मानना है कि देश का बाजार बहुत बड़ा है और यहां छोटे कारोबारियों के लिए हमेशा अवसर रहेंगे। डिलॉयटी के निदेशक गौरव गुप्ता ने कहा, "सुपरबाजारों के काम करने का तरीका छोटे कारोबारियों से अलग होता है। मैं नहीं समझता कि ये सुपरबाजार छोटे कारोबारियों के लिए खतरा हैं।" गुप्ता ने कहा कि समिति ने कम से कम 10 करोड़ डॉलर के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की सीमा तय की है, इसलिए छोटे कारोबारियों को खतरा नहीं है। समति ने सुझाव दिया है कि कुल निवेश का कम से कम आधा हिस्सा शीत भंडार जैसे आधारभूत संरचना में निवेश होना चाहिए। देश में अभी एकल ब्रांड रिटेल में 51 फीसदी और कैश एंड कैरी थोक कारोबार में 100 फीसदी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की इजाजत है। वालमार्ट जैसी अंतरराष्ट्रीय रिटेल कम्पनियों ने पहले से यहां रणनीतिक साझेदारी के तहत कैश एंड कैरी कारोबार शुरू कर दिए हैं और जल्द-से-जल्द अपने सुपरबाजार भी शुरू करना चाहती हैं।