यह ख़बर 19 सितंबर, 2011 को प्रकाशित हुई थी

फर्जी दावा करने वाले विज्ञापनों पर लगेगी लगाम

खास बातें

  • सरकार ने आखिरकार माना है कि देश में गोरेपन की क्रीम और मोटापा घटाने की दवाई के कई विज्ञापनों के जरिए लोगों को फांसा जा रहा है।
नई दि्ल्ली:

सरकार ने आखिरकार माना है कि देश में गोरेपन की क्रीम और मोटापा घटाने की दवाई के कई विज्ञापनों के जरिए लोगों को फांसा जा रहा है। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने दिग्भ्रमित करने वाले इस तरह के विज्ञापन तथा उनके दुष्प्रभावों को गंभीरता से लेते हुए इन पर नियंत्रण की प्रणाली तुरंत स्थापित करने के दिशा-निर्देश दिए हैं। प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव टीकेए नायर ने इस बारे में उपभोक्ता मामलात विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की जिसमें इस मुद्दे पर व्यापक रूप से चर्चा हुई। सूत्रों ने रविवार को बताया कि नायर ने इस तरह के विज्ञापन जारी करने की गतिविधियों पर गहरी चिंता जताई और उपभोक्ता मामलात विभाग से नियामकीय प्रणाली विकसित करने को कहा ताकि इस तरह के विज्ञापनों पर रोक लगाई जा सके। सूत्रों के अनुसार विभाग से इन दिशा निर्देशों का मसौदा महीने भर में तैयार करने को कहा गया है। उन्होंने कहा कि नियामकीय प्रणाली को जल्द से जल्द अमली जामा पहनाया जाएगा क्योंकि पीएमओ इस मुद्दे को लेकर बहुत गंभीर है। प्रस्तावित दिशा निर्देशों के दायरे में वे सब विज्ञापन आएंगे जो गोरा करने, पतला करने या ऐसे ही और वादे करते हैं। इस पहल का उद्देश्य लोगों को इस तरह के भ्रामक विज्ञापनों से बचाना है जो टीवी, अखबारों या एसएमएस के जरिए आते हैं। सूत्रों के अनुसार फिलहाल ऐसे विज्ञापन जारी करने वाली कंपनियों को जवाबदेह बनाने की कोई प्रणाली नहीं है।


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