खास बातें
- भारत ने कहा कि समस्या से जूझ रहे यूरोप के देशों को कोष के लिए पहले अपने केंद्रीय बैंक का सहारा लेना चाहिए।
पेरिस: ऋण संकट में फंसे यूरोप के देश जहां इस समय फिर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से मदद की उम्मीद कर रहे् हैं वहीं भारत ने कहा कि समस्या से जूझ रहे देशों को कोष के लिए पहले अपने केंद्रीय बैंक का सहारा लेना चाहिए। वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि आईएमएफ का कोष तभी इस्तेमाल किया जाए जब कि सम्बद्ध देशों के केंद्रीय बैंकों तथा क्षेत्रीय वित्तीय सुरक्षा प्रणाली समेत सभी संसाधनों से काम न चल रहा हो। मुखर्जी यहां जी-20 वित्त मंत्रियों तथा केंद्रीय बैंक के गवर्नरों की बैठक में भाग लेने के लिए यहां आए हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष में सुधार पर आयोजित सत्र में भाग लेते हुए मुखर्जी ने कहा कि हमने पिछले कुछ साल में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के संसाधन को तिगुना कर दिया है। हमारा ध्यान अब इस बात पर होना चाहिए कि इन संसाधनों को किस प्रकार बेहतर तरीके से उपयोग किया जाए। आईएमएफ के संसाधन बढ़कर 750 अरब डॉलर हो गया जो पहले 250 अरब डॉलर था। अमेरिका के वित्त मंत्री टिमोथी गैथनर ने भी कहा कि यूरोप के पास अपनी समस्याएं दूर करने करने के लिए पर्याप्त संसाधन हैं। आईएमएफ पहले ही ऋण संकट से जूझ रहे यूरोपीय देश ग्रीस की मदद कर चुका है लेकिन यूरोप इस बहुराष्ट्रीय वित्तीय संगठन से 350 अरब डॉलर की और मदद की उम्मीद कर रहा है।