खास बातें
- श्रम मंत्रालय ने कहा कि ईपीएफओ के पास 1,731.57 करोड रुपये का अधिशेष वास्तविक है, और यह किसी लेखा गड़बड़ी का नतीजा नहीं है।
नई दिल्ली: वित्त मंत्रालय के दावे को खारिज करते हुए श्रम मंत्रालय ने कहा कि कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के पास 1,731.57 करोड रुपये का अधिशेष वास्तविक है, और यह किसी लेखा गड़बड़ी का नतीजा नहीं है। श्रम मंत्रालय ने ईपीएफओ द्वारा 2010-11 के लिए 9.5 प्रतिशत का ब्याज देने की घोषणा को उचित ठहराया है। वित्त मंत्रालय ने ईपीएफओ द्वारा भविष्य निधि जमा पर चालू वित्त वर्ष के लिए 9.5 प्रतिशत ब्याज देने की घोषणा पर सवाल उठाते हुए कहा था कि ईपीएफओ के पास मौजूद अधिशेष वास्तविक नहीं है। वित्त मंत्रालय ने कहा था कि ईपीएफओ के पास अतिरिक्त राशि इसलिए दिखाई दे रही है, क्योंकि सभी कर्मचारियों के खातों को अपडेट नहीं किया गया है। वित्त मंत्रालय ने सिर्फ 8.5 प्रतिशत ब्याज पर आयकर छूट को अधिसूचित किया है। ईपीएफओ 2005-06 से इसी दर पर रिटर्न दे रहा है। श्रम मंत्रालय के 29 जनवरी के पत्र में कहा गया है कि ईपीएफओ वेतनभोगियों को ज्यादा रिटर्न देने के लिए सरकार की मदद नहीं मांग रहा। वित्त मंत्रालय की यह आपत्ति नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की उस निष्कर्ष पर आधारित है, जिसमें कहा गया है कि ईपीएफओ के पास कोई अधिशेष नहीं है। कैग ने कहा है कि 1,731 करोड़ रुपये का यह अधिशेष इसलिए दिखाई दे रहा है, क्योंकि 4.72 करोड़ सदस्यों के खातों को अपडेट नहीं किया गया है। जवाबी तर्क में श्रम मंत्रालय ने कहा है कि ईपीएफओ ने अतिरिक्त ब्याज देने के लिए प्रावधान रखा हुआ है, बेशक खातों को दुरुस्त किया गया हो या नहीं। ईपीएफओ के निर्णय लेने वाले शीर्ष निकाय केंद्रीय न्यासी बोर्ड ने ब्याज सस्पेंस खाते में 1,731.57 करोड़ रुपये के अधिशेष के मद्देनजर 9.5 प्रतिशत का ब्याज देने की घोषणा की थी।