यह ख़बर 06 फ़रवरी, 2011 को प्रकाशित हुई थी

'ईपीएफओ के पास वास्तव में कोई अधिशेष नहीं'

खास बातें

  • कैग ने कहा कि ईपीएफओ के पास कोई अधिशेष धन नहीं है और संगठन जिसे अतिरिक्त धन बता रहा है वह राशि उसे अंशधारकों के खाते में अभी डालनी है।
नई दिल्ली:

सरकारी लेखापरीक्षक कैग का कहना है कि कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के पास वास्तव में कोई अधिशेष धन नहीं है और संगठन जिसे अतिरिक्त धन बता रहा है वह राशि उसे अंशधारकों के खाते में अभी डालनी है। कैग का कहना है कि 1,731 करोड़ रुपये की इसी बकाया राशि को संगठन 'गुप्त खजाना' बताते हुए अंशधारकों के लिए साढ़े नौ प्रतिशत की ब्याज दर की पेशकश कर रहा है। ईपीएफओ 2005-06 से ही अपने अंशधारकों को 8.5 प्रतिशत की दर से ब्याज दे रहा था। लेकिन उसने 1,731.57 करोड़ रुपये के अधिशेष का हवाला देते हुए 2010-11 के लिए दर को 9.5 प्रतिशत कर दिया। उधर, वित्त मंत्रालय सूत्रों का कहना है कि ईपीएफओ के ब्याज निलंबन वाले खातों में (आईएसए) में अतिरिक्त राशि इसलिए एकत्रित हो गई क्योंकि संगठन ने मार्च 2010 तक 4.72 करोड़ अंशधारकों के खातों को अद्यतन ही नहीं किया है। ईपीएफओ के पास लगभग 10 करोड़ खाते हैं।


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