खास बातें
- आर्थिक समीक्षा में अगले वित्तवर्ष के लिए 9% से अधिक की वृद्धि दर का अनुमान जताया गया है, जबकि मौजूदा वित्तवर्ष के लिए इसके 8.6% रहने का अनुमान है।
Mumbai: भले ही सरकार अगले वित्तवर्ष के लिए आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान को लेकर उत्साहित है, लेकिन अर्थशास्त्रियों की मानें तो घरेलू और वैश्विक बाजार में जो बयार चल रही है, उसे देखते हुए मौजूदा दर को बनाए रखना भी मुश्किल है। वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी द्वारा 25 फरवरी को संसद में पेश आर्थिक समीक्षा में अगले वित्तवर्ष के लिए 9 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर का अनुमान जताया गया है, जबकि मौजूदा वित्तवर्ष के लिए आर्थिक वृद्धि दर 8.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है। अर्न्स्ट एंड यंग के अर्थशास्त्री अश्विन पारेख ने कहा, अनुमानित 9 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर हासिल करना मुश्किल लगता है। पिछले चार महीने में न केवल हमारे लिए, बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था में व्यापक आर्थिक हालात पूरी तरह बदल गए हैं। उन्होंने कहा कि अगर लीबियाई राजनीतिक संकट के चलते तेल संकट पर अगले एक महीने के भीतर काबू पा लिया जाता है, तो घरेलू अर्थव्यवस्था के समक्ष बड़ी चुनौती पैदा नहीं होगी, लेकिन अगर यह दो महीने से आगे बढ़ता है, तो निश्चित तौर पर एक बड़ी चुनौती पैदा हो जाएगी। डेलायट के प्रधान अर्थशास्त्री शांतो घोष ने कहा कि उच्च जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान पेश करते हुए मंत्रालय कई मुद्दों पर बाहरी चमक से घिरा रहा। कौशल विकास पर पर्याप्त ध्यान दिए बिना विकास के लिए सेवा क्षेत्र पर निर्भरता जोखिम भरा है। क्रिसिल के मुख्य अर्थशास्त्री डीके जोशी का मानना है कि उच्च मुद्रास्फीति और बाहरी हालात को देखते हुए अनुमानित वृद्धि को लक्ष्य करना आसान नहीं होगा।