यह ख़बर 24 अक्टूबर, 2011 को प्रकाशित हुई थी

दिवाली में उपहारों पर कंपनियां बरत रहीं हैं सतर्कता

खास बातें

  • लगातार उच्चस्तर पर बनी महंगाई का असर इस बार दिवाली पर दिए जाने वाले तोहफों में 25 से 30 प्रतिशत तक कटौती के रूप में सामने आया है।
नई दिल्ली:

पिछले करीब दो साल से लगातार उच्चस्तर पर बनी महंगाई का असर इस बार दिवाली पर दिए जाने वाले तोहफों और उपहारों में 25 से 30 प्रतिशत तक कटौती के रूप में सामने आया है। वाणिज्य एवं उद्योग मंडल एसोचैम के अध्ययन में यह निष्कर्ष आया है। एसोचैम के अनुसार पिछले साल औद्योगिक घरानों ने करीब 3,200 करोड़ रुपये के उपहार दिवाली के अवसर पर वितरित किए थे लेकिन इस बार ऊंची ब्याज दरों, कम होते मार्जिन और मांग पर बढ़ते दबाव के चलते यह खरीदारी घटकर 2,200 करोड़ रुपये रह जाने का अनुमान है। यानी इस बार करीब 1,000 करोड़ रुपये की कटौती दिवाली के मौके पर दिए जाने वाले उपहार और भेंट में हुई है। कंपनियां अपने कर्मचारियों और सहयोगियों को दिवाली के मौके पर शुभकामनाएं और बेहतर भविष्य की उम्मीदों के साथ कई तरह के तोहफे उपहार में भेंट करती हैं। दिवाली के तोहफे एक तरह से कंपनियों के लिए उनके ब्रांड निर्माण में भी मदद करते हैं। लेकिन इस बार बजट कटौती के चलते उपहारों की बिक्री कम हुई है। एसोचैम महासचिव डीएस रावत के अनुसार औषधि, अचल संपत्ति, त्वरित उपभोग वाली उपभोक्ता वस्तुएं और नागरिक उड्डयन क्षेत्र की कंपनियों में कारपोरेट उपहारों के बजट में इस बार 25 से 30 प्रतिशत तक कटौती की गई। हालांकि, यह माना जा रहा है कि मात्रा पर इसका कोई असर नहीं होगा क्योंकि कई लघु और मझोली कंपनियां भी बाजार में कूद पड़ी हैं।


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