खास बातें
- केंद्र ने राज्यों से बिजली शुल्क बढ़ाने को कहा ताकि बिजली वितरण कंपनियों की वित्तीय हालत सुधारी जा सके।
नई दिल्ली: केंद्र ने राज्यों से बिजली शुल्क बढ़ाने को कहा ताकि बिजली वितरण कंपनियों की वित्तीय हालत सुधारी जा सके। इन कंपनियों को अपनी खराब बैलेंस शीट के कारण बैंकों से धन जुटाने में दिक्कत हो रही है। वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा, 'वितरण कंपनियों की परिचालन दक्षता में सुधार होना चाहिए। राज्यों को शुल्क दरों की नियमित समीक्षा व संशोधन करना होगा ताकि इन कंपनियों की बेहतर वित्तीय हालत सुनिश्चित की जा सके।' योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह आहलूवालिया ने आगाह किया कि इस क्षेत्र के लिए धन स्रोत शीघ्र ही सूख जाएगा। उन्होंने कहा कि वाणिज्यिक बैंकों को अपनी बैलेंस शीट देखनी होती है और वे अनिश्चितकालीन ऋण नहीं दे सकते। कुछ वितरण कंपनियों ने अपनी दरें दस साल से नहीं बढ़ाई हैं और उनका कुल नुकसान अनुमानित 70,000 करोड़ रुपये है।' बिजली उत्पादन में हाल ही की दिक्कतों के संदर्भ में मुखर्जी ने कहा कि यह क्षेत्र कोयले व प्राकृतिक गैस की कमी की समस्या से जूझ रहा है। उन्होंने कहा, 'भूमि अधिग्रहण, राज्य बिजली बोर्डों की खस्ता हालत व पर्यावरणीय मंजूरी जैसे मुद्दे भी इस क्षेत्र को प्रभावित कर रहे हैं।' मुखर्जी ने कहा कि वितरण कंपनियों की दक्षता 'खेदजनक ढंग से कम' है और कुल तकनीकी व वाणिज्यिक नुकसान औसतन 40 प्रतिशत से अधिक है।