यह ख़बर 04 मार्च, 2012 को प्रकाशित हुई थी

ईंधन के सीधे आयात से राज्यों को 2,500 करोड़ रुपए का नुकसान

खास बातें

  • केन्द्र की विमानन कंपनियों को सीधे जेट ईंधन आयात करने की अनुमति देने से राज्यों को सालाना 2,500 करोड़ रुपए के कर राजस्व का नुकसान होगा।
नई दिल्ली:

केन्द्र की विमानन कंपनियों को सीधे जेट ईंधन आयात करने की अनुमति देने से राज्यों को सालाना 2,500 करोड़ रुपए के कर राजस्व का नुकसान होगा।

वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) पर राज्यों के वित्त मंत्रियों की समिति के अध्यक्ष और बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा ‘विमानन कंपनियों द्वारा जेट ईंधन के सीधे आयात से राज्यों को 2,500 करोड़ रुपए के कर राजस्व का नुकसान होगा। हालांकि, इस मामले में केंद्र ने अपने राजस्व को सुरक्षित रखा है लेकिन राज्यों को इस पहल से नुकसान होगा।’

पिछले महीने केंद्र ने ऋण संकट में फंसी विमानन कंपनियों को सीधे जेट ईंधन का आयात करने की मंजूरी दी थी जिससे वह राज्यों को बिक्री कर देने से बच जाएंगे। राज्य सरकारें आम तौर पर जेट ईंधन पर चार से 40 फीसद तक कर वसूलती हैं।

वर्तमान में सभी विमानन कंपनियां इंडियन आयल जैसी घरेलू तेल शोधक कंपनियों से ही जेट इर्ंधन खरीदती हैं, इस समय ज्यादातर एयलाइंस कंपनियां घाटे में चल रही हैं। हालांकि, जेट ईंधन की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार के अनुरूप तय होती है लेकिन राज्यों के बिक्री कर के कारण विमानन कंपनियों के लिए वास्तविक लागत बढ़ जाती है।

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भारत में स्थानीय कर के कारण जेट ईंधन की कीमत वैश्विक औसत से 50 फीसद अधिक होती है। कुछ आकलनों में कहा गया है कि सीधे आयात से ईंधन कीमत 20 फीसद तक कम होगी।