साइरस मिस्त्री ने टाटा ग्रुप के लिए परिवार का समय, पारिवारिक व्यापार कुर्बान कर दिए : सुप्रिया सुले

साइरस मिस्त्री ने टाटा ग्रुप के लिए परिवार का समय, पारिवारिक व्यापार कुर्बान कर दिए : सुप्रिया सुले

नई दिल्ली:

साइरस मिस्त्री ने टाटा ग्रुप का चेयरमैन बनाए जाने के बाद 'अपने परिवार को दिया जाने वाला पूरा समय तथा पारिवारिक व्यापार को' कुर्बान कर दिया था, और यह कहना गलत होगा कि उन्होंने उस भूमिका में 'खराब' प्रदर्शन किया. यह कहना है खुद को साइरस तथा उनकी पत्नी रोहिका चागला का करीबी मित्र बताने वाली राजनेता सुप्रिया सुले का.

48-वर्षीय साइरस मिस्त्री को सोमवार को अचानक ही टाटा सन्स के चेयरमैन पद से हटा दिया गया था, और उनके स्थान पर उनके पूर्ववर्ती रतन टाटा को अंतरिम चेयरमैन के रूप में तब तक के लिए वापस लाया गया है, जब तक खासतौर से बनाया गया पैनल नए स्थायी चेयरमैन का चुनाव नहीं कर लेता.

साइरस मिस्त्री की पारिवारिक कंपनी शापूरजी पैलोनजी कन्स्ट्रक्शन के कारोबार का बड़ा नाम है, और टाटा ग्रुप के सबसे बड़े शेयरधारकों में शुमार होता है. सुप्रिया सुले ने NDTV से बातचीत में कहा, "साइरस मिस्त्री अपने पारिवारिक कारोबार को कामयाबी से चला रहे थे... उन्होंने टाटा को लाभ पहुंचाने के लिए बदलाव लाने की खातिर काफी मेहनत की..." दरअसल, साइरस मिस्त्री ने इस विवाद पर कुछ भी कहने से इंकार कर दिया है, और उनसे निजी जान-पहचान रखने वाले लोगों में से किसी एक की यह पहली टिप्पणी है.

दूसरी ओर, रतन टाटा के करीबी लोगों का कहना है कि टाटा बोर्ड ने एक महीने तक साइरस मिस्त्री को इस तरह हटाए जाने की तैयारी की थी, ताकि उनके फैसले को कानूनी रूप से चुनौती न दी जा सके.

टाटा ग्रुप के लंबे समय तक सलाहकार रहे हरीश साल्वे ने बताया कि साइरस मिस्त्री का यूके में व्यापक रूप से फैले स्टील कारोबार समेत रतन टाटा द्वारा अधिग्रहीत की गई संपत्तियों को बेचने का फैसला ग्रुप के निदेशकमंडल को पसंद नहीं आया.

साइरस मिस्त्री ने उन्हें हटाने का फैसला करने वाले बोर्ड को लिखे ईमेल में कहा कि उन्हें अपना पक्ष रखने या बचाव करने का मौका नहीं दिया गया, और उन्हें हटाए जाने के लिए आवश्यक प्रक्रिया का पालन भी नहीं किया गया. उनके ऑफिस से जारी एक बयान में कहा गया है कि वह 'इस वक्त' टाटा ग्रुप के खिलाफ अदालत में जाने के बारे में नहीं सोच रहे हैं.

इस वक्त टाटा ग्रुप पर 30 अरब अमेरिकी डॉलर का कर्ज़ा है.

बोर्ड को लिखे ईमेल में साइरस मिस्त्री ने कहा कि उन्हें वह आज़ादी नहीं दी गई, जिसका वर्ष 2012 के अंत में उन्हें चेयरमैन बनाए जाते वक्त उनसे वादा किया गया था. उनका काम करने का तरीका रतन टाटा से बिल्कुल उलट था, जिन्होंने स्टीलनिर्माता कोरस तथा जैगुआर लैंड रोवर जैसी वैश्विक कंपनियों को खरीदने पर अरबों डॉलर खर्च किए. साइरस मिस्त्री ने यूके में कोरस को अधिग्रहीत किए जाने से बने स्टील कारोबार को बेचने का इरादा बनाया, लेकिन उस कदम को रोक दिया गया. हरीश साल्वे ने साइरस के उस फैसले को एक 'बड़ा गलत' कदम बताया, और कहा कि उससे टाटा की साख और प्रतिबद्धता को धक्का लगा, क्योंकि टाटा ग्रुप का हमेशा यही कहना रहा है कि वे व्यापारों में निवेश नहीं करते हैं, बल्कि कंपनियों को परिवार का अभिन्न अंग मानते हैं.


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