यह ख़बर 01 दिसंबर, 2013 को प्रकाशित हुई थी

विदेश व्यापार नीति में प्रतिस्पर्धा कानून लागू हों

नई दिल्ली:

कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय ने वाणिज्य मंत्रालय से कहा है कि वह प्रस्तावित विदेश व्यापार नीति में प्रतिस्पर्धा कानून लागू करे ताकि भारतीय बाजारों में उचित और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित हो सके।

विदेश व्यापार नीति-2008-14 की वैधता अगले साल मार्च के अंत तक खत्म हो जाएगी।

वाणिज्य मंत्रालय ने विदेश व्यापार नीति पर कॉरपोरेट मामले के मंत्रालय समेत विभिन्न विभागों और मंत्रालयों से विचार मांगे हैं।

अधिकारियों ने कहा कि कॉरपोरेट मामले के मंत्रालय ने व्यापार में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करने को कहा है।

कॉरपोरेट मामले के मंत्रालय ने कहा कि विदेश व्यापार नीति में प्रतिस्पर्धा कानून 2002 के प्रावधान का ध्यान रखा जाना चाहिए ताकि प्रतिस्पर्धा रोधी गतिविधियां भारतीय बाजार में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को प्रभावित न कर सकें, उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा की जा सके और भारतीय बाजारों में अन्य भागीदारों द्वारा कारोबार में स्वतंत्रता सुनिश्चित की जा सके।

एक अन्य अधिकारी ने कहा, 'अगली विदेशी व्यापार नीति में लंबी और मध्यम अवधि की रणनीति शामिल होनी चाहिए ताकि व्यापार प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाई जा सके। इस नीति में ऐसी पहलें भी शामिल होनी चाहिए जिससे हमारे निर्यातक उत्पादकता बढ़ाकर व निर्यात योग्य वस्तुओं के अतिरिक्त उत्पादन के जरिये और प्रतिस्पर्धी हो सकें।'

चालू खाते के घाटे में बढ़ातरी के मद्देनजर वाणिज्य मंत्रालय निर्यात बढ़ाने और आयात का विकल्प तैयार करने के तरीकों पर काम कर रहा है।

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सोने और तेल आयात में बढ़ोतरी के मद्देनजर पिछले वित्त वर्ष में चालू खाते का घाटा बढ़कर सकल घरेलू उत्पाद के 4.8 प्रतिशत के बराबर या 88.2 अरब डॉलर पर पहुंच गया था।