खास बातें
- ग्रामीण परिवारों की खर्च करने की राशि के मामले में केरल और पंजाब शीर्ष पर रहे। महाराष्ट्र, बिहार, गुजरात और मध्य प्रदेश में भी इसकी वृद्धि राष्ट्रीय औसत से अधिक रही।
मुंबई: देश के ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की आय बढ़ने के साथ उनका बिजली के सामान, फोन जैसे टिकाऊ उपभोक्ता सामानों पर खर्च बढ़ रहा है। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल की एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, टिकाऊ उपभोक्ता सामानों पर लोग अब ज्यादा खर्च कर रहे हैं। हाल के सालों में ऐसा रुझान बढ़ा है। इनके दाम में अपेक्षाकृत कम वृद्धि को देखते हुए लोग अपनी इच्छा से इन पर खर्च कर रहे हैं। इसमें कहा गया है कि 2009-10 में प्रत्येक दो ग्रामीण परिवारों में कम से कम एक के पास साइकिल, बिजली का पंखा और मोबाइल फोन था।
रिपोर्ट में हालांकि कहा गया है कि टिकाऊ उपभोक्ता सामान की पहुंच ग्रामीण इलाकों में भिन्न है। यह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि इसके पीछे ऊंची आमदनी एक आवश्यक कारक है, लेकिन किसी टिकाऊ उपभोक्ता सामान की खरीद के लिए यही एकमात्र कारण नहीं होता।
रिपोर्ट में कहा गया है कि अपनी इच्छा से खर्च करने वाली राशि 2004-05 में 14,000 रुपये थी, वहीं 2009-10 में यह बढ़कर 24,000 रुपये हो गई। इसमें सालाना आधार पर 11 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो महंगाई की दर से अधिक है। इस अवधि में महंगाई की दर सालाना आधार पर छह प्रतिशत बढ़ी। ग्रामीण परिवारों की खर्च करने की राशि के मामले में केरल और पंजाब शीर्ष पर रहे। महाराष्ट्र, बिहार, गुजरात और मध्य प्रदेश में भी इसकी वृद्धि राष्ट्रीय औसत से अधिक रही।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इस तरह की खर्च की दर की वृद्धि आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल और कर्नाटक में कम रही। बिजली की उपलब्धता के बारे में रिपोर्ट में कहा गया है कि इस तरह के उत्पादों पर खर्च में बिजली एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि भविष्य में गरीब राज्यों में टिकाऊ उपभोक्ता सामान खरीदने की ग्रामीण परिवारों की क्षमता ज्यादा तेजी से बढ़ेगी, लेकिन बिजली की उपलब्धता का इनकी बिक्री में महत्वपूर्ण योगदान होगा। खासकर बिहार, बंगाल और उत्तर प्रदेश के मामले में यह बात सच साबित होगी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि सड़क संपर्क बेहतर न होने से दोपहिया, कार और जीप की पहुंच प्रभावित होती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्रामीण इलाकों में दोपहिया और कारों की बिक्री में धनराशि की उपलब्धता एक महत्वपूर्ण कारक है, लेकिन इसके लिए सड़क ढांचे में भी सुधार की जरूरत है।