यह ख़बर 16 दिसंबर, 2014 को प्रकाशित हुई थी

कोयला घोटाला : कोर्ट ने सीबीआई को पूर्व पीएम मनमोहन सिंह का बयान दर्ज करने कहा

फाइल फोटो

नई दिल्ली:

कोयला ब्लॉक आवंटन मामले की सुनवाई कर रही विशेष अदालत ने जांच एजेंसी केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से इस मामले में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का बयान दर्ज करने के लिए कहा है, जिनके पास उस समय कोयला मंत्रालय का प्रभार था।

विशेष न्यायाधीश भरत पराशर ने सीबीआई से इस मामले में मनमोहन का बयान दर्ज करने के लिए कहा। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 27 जनवरी की तारीख तय करते हुए सीबीआई से आगे की जांच करने के लिए कहा।

न्यायाधीश ने कहा, मैंने आगे की जांच करने का आदेश दिया है। मैं चाहता हूं कि अन्य अधिकारियों के साथ-साथ तत्कालीन कोयला मंत्री (मनमोहन सिंह) का बयान भी दर्ज किया जाए।

सीबीआई ने अक्टूबर 2013 में कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला, कोयला मंत्रालय के पूर्व सचिव पी.सी. पारख तथा अन्य के खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र तथा भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया था। लेकिन 28 अगस्त को जांच एजेंसी ने सबूतों के अभाव में इस मामले को बंद करने की रिपोर्ट दी थी।

सीबीआई ने अपनी क्लोजर रिपोर्ट में कहा था, जांच के दौरान जो सबूत एकत्र किए गए, वे उन लोगों के खिलाफ पर्याप्त नहीं हैं, जिनके नाम प्राथमिकी में दर्ज हैं।

इससे पहले अदालत ने सीबीआई से पूछा था कि वह किस आधार पर इस मामले को बंद करने के निष्कर्ष पर पहुंची और उसने इस मामले में किस तरह की जांच की।

अदालत ने सीबीआई से यह भी पूछा था कि क्या बिड़ला की कंपनी हिंडाल्को को कोयला ब्लॉक का आवंटन करने में किसी तरह की आपराधिकता का तत्व शामिल था।

विशेष लोक अभियोजक आरएस चीमा ने पिछले महीने की सुनवाई में अदालत को बताया था कि वह सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट पर संज्ञान ले सकती है।

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अदालत ने 25 नवंबर को जांच अधिकारी से पूछा था कि क्या इस मामले में प्रधानमंत्री कार्यालय तथा तत्कालीन कोयला मंत्री से पूछताछ की गई थी। इसके जवाब में अधिकारी ने कहा था कि प्रधानमंत्री कार्यालय के कुछ अधिकारियों से पूछताछ की गई थी, लेकिन तत्कालीन कोयला मंत्री से पूछताछ नहीं की गई थी।