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नई दिल्ली:
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने वर्ष 2005 में कोयला ब्लॉकों के आवंटन में कथित अनियमितताओं को लेकर मंगलवार को उद्योगपति कुमारमंगलम बिड़ला और पूर्व कोयला सचिव पीसी पारेख के खिलाफ आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार के मामले दर्ज किए।
कोयला घोटाले में ताजा प्राथमिकी (फर्स्ट इन्फॉरमेशन रिपोर्ट या एफआईआर) दर्ज करने के बाद सीबीआई की टीमों ने मुंबई, दिल्ली, हैदराबाद और भुवनेश्वर में करीब छह जगहों पर तलाशी भी ली। सीबीआई सूत्रों ने बताया कि कि आदित्य बिड़ला समूह के 46-वर्षीय प्रमुख को पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा।
सीबीआई सूत्रों ने यह भी कहा कि एजेंसी ने ओडिशा में 10 नवंबर, 2005 को आवंटित किए गए तालाबीरा के दो कोयला ब्लॉकों को लेकर आदित्य बिड़ला समूह और समूह की एल्युमिनियम निर्माता कंपनी हिन्डालको के प्रतिनिधि के तौर पर कुमारमंगलम बिड़ला के खिलाफ मामला दर्ज किया।
सीबीआई सूत्रों ने बताया कि जांच समिति की 25वीं बैठक के दौरान विद्युत उत्पादन के लिए ये ब्लॉक आवंटित किए गए थे। सीबीआई प्रवक्ता कंचन प्रसाद ने कहा, ''सीबीआई तत्कालीन कोयला सचिव, आदित्य बिड़ला समूह की प्रतिनिधि मेसर्स हिन्डालको, अज्ञात व्यक्तियों एवं अधिकारियों के खिलाफ एक ताजा मामला दर्ज करती है।''
इस बीच, तकरीबन 2.45 लाख करोड़ रुपये के समूह ने कोई प्राथमिकी प्राप्त होने से इनकार किया है, और उन्होंने कदाचार के आरापों से भी इनकार किया है। आदित्य बिड़ला समूह के प्रवक्ता ने एनडीटीवी से बातचीत में कहा, "कंपनी को सीबीआई द्वारा दर्ज की गई एफआईआर की प्रति नहीं मिली है, और ग्रुप का मानना है कि ऐसा कोई कारण नहीं है कि कोलगेट में हमारे खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज कराई जाए...।"
इस बीच, कुमारमंगलम बिड़ला की कंपनी हिन्डालको ने भी एक बयान जारी कर दावा किया है कि कोयला आवंटन के लिए सरकार द्वारा स्थापित नियमों के अनुसार हमने सभी प्रक्रियाओं का पूरी तरह पालन किया है।
कंपनी द्वारा जारी बयान में कहा गया, "कोयला मामले में हिन्डालको और हमारे अध्यक्ष के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने से संबंधित मीडिया रिपोर्टों के संदर्भ हम यह बयान जारी कर रहे हैं... वस्तुतः यह मामला कंपनियों को कोल आवंटन किए जाने से जुड़े एक बड़े मामले का हिस्सा है, और चूंकि हमारी कंपनी भी उन कंपनियों में से एक है, अतः हमारी भी जांच की जा रही है... हम बिल्कुल साफ कहना चाहेंगे कि हमने कोल आवंटन के लिए सरकार द्वारा स्थापित नियमों के अनुसार ही प्रत्येक आवश्यक प्रक्रिया का पूरी तरह पालन किया है... "
वैसे, सीबीआई की इस कार्रवाई का तुरंत असर दिखाई दिया, हिन्डालको के शेयरों में सुबह के सत्र में ही 1.27 फीसदी की गिरावट आ गई। बिड़ला की कुछ अन्य कंपनियां भी इससे प्रभावित हुई हैं।
कोयला ब्लाकों के आवंटन के समय पारेख कोयला सचिव थे। उनपर भ्रष्टाचार निर्मूलन अधिनियम के साथ ही आपराधिक षड्यंत्र रचने और अन्य अपराधों के आरोप हैं। सीबीआई को हाल के दिनों में सुप्रीम कोर्ट में कई मुश्किल सवालों का सामना करना पड़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने उससे पूछा था कि कोई पारदर्शी बोली प्रक्रिया अपनाए बिना कोयला क्षेत्रों को निजी कंपनियों को आवंटित क्यों किया गया। उसे जांच की सुस्त रफ्तार और साथ ही गुम हुई फाइलों पर भी सवालों से गुजरना पड़ा।