दिसंबर में कोयला आधारित बिजली उत्पादन 15 प्रतिशत बढ़कर 9,844 करोड़ यूनिट हुआ: मंत्रालय

देश में एक-चौथाई बिजली की आपूर्ति (Power Supply) नेशनल थर्मल पावर प्लांटयानी एनटीपीसी (NTPC) करती है. पिछले दिनों  कंपनी ने कहा था कि कोयला आधारित बिजली उत्पादन देश में बिजली आपूर्ति की रीढ़ है.

दिसंबर में कोयला आधारित बिजली उत्पादन 15 प्रतिशत बढ़कर 9,844 करोड़ यूनिट हुआ: मंत्रालय

देश के कुल बिजली उत्पादन (Power Generation) में कोयला आधारित बिजली उत्पादन (Coal Based Power Generation) का योगदान 76.59 प्रतिशत है.

नई दिल्ली:

कोयला मंत्रालय (Coal Ministry) के अनुसार, देश का कोयला आधारित बिजली उत्पादन (Coal Based Power Generation) दिसंबर में 15.03 प्रतिशत बढ़कर 9,844.3 करोड़ यूनिट हो गया है . पिछले वित्त वर्ष के समान महीने में कोयला आधारित बिजली उत्पादन 8,557.9 करोड़ यूनिट था. देश के कुल बिजली उत्पादन (Power Generation) में कोयला आधारित बिजली उत्पादन का योगदान 76.59 प्रतिशत है. कोयला मंत्रालय के दिसंबर, 2022 के मासिक आंकड़ों (अस्थायी) के अनुसार, दिसंबर महीने में कोयला आधारित और कुल बिजली उत्पादन दोनों में सालाना आधार पर वृद्धि दर्ज की गई है.

दिसंबर में कुल बिजली उत्पादन में 13.65 प्रतिशत की बढ़ोतरी

आंकड़ों के अनुसार, ‘‘कोयला आधारित बिजली उत्पादन दिसंबर, 2021 की तुलना में दिसंबर, 2022 में 15.03 प्रतिशत बढ़ा है. वहीं, इस अवधि में कुल बिजली उत्पादन में 13.65 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. इसी तरह  पिछले महीने यानी नवंबर की तुलना में दिसंबर, 2022 में कुल बिजली उत्पादन 8.90 प्रतिशत अधिक रहा है. नवंबर में कुल बिजली उत्पादन 11,802.9 करोड़ यूनिट रहा था. यह दिसंबर में बढ़कर 12,853.6 करोड़ यूनिट हो गया.

लिग्नाइट आधारित बिजली उत्पादन मामूली रूप से घटा

हालांकि, दिसंबर में लिग्नाइट आधारित बिजली उत्पादन मामूली रूप से घटकर 222.7 करोड़ यूनिट रह गया, जो पिछले वित्त वर्ष के इसी महीने में 227.2 करोड़ यूनिट था. पिछले महीने पनबिजली बिजली उत्पादन 5.94 प्रतिशत बढ़कर 913.2 करोड़ यूनिट हो गया, जो एक साल पहले समान अवधि में 862 करोड़ यूनिट था.

कोयला आधारित बिजली उत्पादन देश में बिजली आपूर्ति की रीढ़

देश में एक-चौथाई बिजली की आपूर्ति नेशनल थर्मल पावर प्लांटयानी एनटीपीसी (NTPC) करती है. पिछले दिनों  कंपनी ने कहा था कि कोयला आधारित बिजली उत्पादन देश में बिजली आपूर्ति की रीढ़ है और यह स्थिति अगले दो-तीन दशक तक बनी रहेगी.

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