यह ख़बर 30 अक्टूबर, 2011 को प्रकाशित हुई थी

'उपभोक्ताओं को सीधे कम्पनियों से मिले बिजली'

खास बातें

  • निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सीआईआई ने उपभोक्ताओं को सीधे उत्पादकों से बिजली खरीदने की अनुमति देने की वकालत की है।
नई दिल्ली:

निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने उपभोक्ताओं को सीधे उत्पादकों से बिजली खरीदने की अनुमति देने की वकालत की है। उनका मानना है कि इससे विद्युत व्यवस्था की मौजूदा स्थिति में सुधार होगा। सीआईआई के अनुसार, उपभोक्ता को यह अधिकार मिलने के बाद वे राज्य विद्युत बोर्ड से भी सस्ती दरों पर बिजली खरीद सकेंगे। इससे विभिन्न राज्य विद्युत बोर्ड के बीच प्रतिस्पर्धा भी बढ़ेगी। सीआईआई ने विद्युत को प्रस्तावित वस्तु एवं सेवा कर के दायरे में रखने की भी अनुशंसा की। इसकी ओर से जारी बयान में यह भी कहा गया है कि उच्च बिजली वितरण घाटा सकल घरेलू उत्पाद को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है। इसके मुताबिक, "सरकार हालांकि बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाने की लगातार कोशिश कर रही है, लेकिन वितरण क्षेत्र की खराब वित्तीय स्थिति के कारण देश का विद्युत क्षेत्र प्रभावित हो रहा है।" सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी के अनुसार, वित्तीय घाटा अनुमानत: राष्ट्रीय सकल घरेलू उत्पाद का करीब 1.5 प्रतिशत है। यह इस क्षेत्र में निजी निवेश के साथ-साथ वैश्विक निवेश को भी प्रभावित करेगा। सीआईआई ने विद्युत वितरण के क्षेत्र में सुधार के लिए वितरण कम्पनियों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ाने का सुझाव दिया है।


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