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- ऑल इंडिया एसोसिएशन ऑफ चिटफंड ने सोमवार को सरकार और समाचार माध्यमों से आग्रह किया कि पश्चिम बंगाल के शारदा समूह को चिटफंड क्षेत्र के साथ न जोड़ा जाए, क्योंकि कम्पनी चिटफंड के रूप में पंजीकृत नहीं थी।
नई दिल्ली: ऑल इंडिया एसोसिएशन ऑफ चिटफंड ने सोमवार को सरकार और समाचार माध्यमों से आग्रह किया कि पश्चिम बंगाल के शारदा समूह को चिटफंड क्षेत्र के साथ न जोड़ा जाए, क्योंकि कम्पनी चिटफंड के रूप में पंजीकृत नहीं थी।
ऑल इंडिया एसोसिएशन ऑफ चिटफंड के महासचिव टीएस सिवरामकृष्णन ने कहा, 'हमने कोलकाता में चिटफंड के पंजीयक से पुष्टि कर ली है कि शारदा पंजीकृत नहीं है। कम्पनी कई क्षेत्रों में काम कर रही थी, और यह स्पष्ट है कि उन्होंने कोई चिटफंड कम्पनी नहीं बनाई थी। फिर भी उनकी असफलता का दोष चिटफंड पर मढ़ा जा रहा है।' संगठन ने कहा कि सरकार चिटफंड को बली का बकरा बना रही है।
सिवरामकृष्णन ने कहा कि चिटफंड कम्पनियां पैसे की वसूली या कोई अन्य कारोबार बिना पंजीयक या राज्य सरकार की अनुमति के नहीं कर सकती हैं और यह अनुमति अभी नहीं दी जा रही है।
एसोसिएशन ने कहा कि देशभर में 10 हजार चिटफंड कम्पनियां हैं और सालाना 30 हजार करोड़ रुपये का कारोबार करती हैं। उन्होंने कहा, "चिटफंड पूरी तरह वैध है और चिट फंड अधिनियम 1982 के तहत चलती है।" और इस पर राज्य सरकार का नियंत्रण होता है। यहां तक कि बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन ने देश में गरीबी उन्मूलन के लिए चिटफंड के रास्ते को चुना है।