खास बातें
- वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने चालू वित्तवर्ष के दौरान सरकारी खर्च को पूरा करने के लिए बाजार से अतिरिक्त कर्ज उठाए जाने की संभावनाओं से इनकार किया और कहा कि सरकार बढ़े खर्च की उधारी को वर्ष के लिए तय मौजूदा सीमा में ही पूरा कर लेगी।
नई दिल्ली: वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने चालू वित्तवर्ष के दौरान सरकारी खर्च को पूरा करने के लिए बाजार से अतिरिक्त कर्ज उठाए जाने की संभावनाओं से इनकार किया और कहा कि सरकार बढ़े खर्च की उधारी को वर्ष के लिए तय मौजूदा सीमा में ही पूरा कर लेगी।
उन्होंने संसद के बाहर संवाददाताओं से कहा, पेट्रोलियम सब्सिडी पर 28,500 करोड़ रुपये, एयर इंडिया में इक्विटी डालने पर 2,000 करोड़ रुपये और कुछ अन्य छोटी चीजों पर 300 करोड़ रुपये खर्च होंगे, इसलिए हमें लगता है कि इस राशि को हम मौजूदा ऋण सीमा में ही समायोजित कर सकते हैं।
उन्होंने कहा, फिलहाल हमें नहीं लगता कि जितनी राशि का संकेत दिया गया है, उससे अधिक जुटाने की जरूरत है। सरकार ने चालू वित्तवर्ष के दौरान बाजार एवं बैंकों से 5.7 लाख करोड़ रुपये ऋण जुटाने का अनुमान लगाया था, ताकि उसके आय-व्यय के अंतर को पाटा जा सके। वित्तमंत्री ने इससे पहले कहा था कि राजकोषीय घाटा बढ़कर सकल घरेलू उत्पाद के 5.3 फीसदी पर पहुंच सकता है, जबकि बजट में चालू वित्तवर्ष में 5.1 फीसदी के राजकोषीय घाटे का अनुमान जाहिर किया गया था।
वित्तवर्ष 2012-13 की पहली छमाही (अप्रैल से सितंबर) के दौरान राजकोषीय घाटा 3.37 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जो बजट अनुमान के मुकाबले 65.6 फीसदी अधिक है।