केंद्र ने राज्य सरकारों को ओएमएसएस के तहत चावल, गेहूं की बिक्री रोकी

हालांकि कर्नाटक सरकार को इस फैसले से पहले ही अवगत करा दिया गया है जिसने जुलाई के लिए बिना ई-नीलामी के ओएमएसएस के तहत अपनी योजना के लिए 3,400 रुपये प्रति क्विंटल की दर से 13,819 टन चावल मांगा था.

केंद्र ने राज्य सरकारों को ओएमएसएस के तहत चावल, गेहूं की बिक्री रोकी

प्रतीकात्मक तस्वीर.

नई दिल्ली:

केंद्र ने 'खुला बाजार बिक्री योजना' (ओएमएसएस) के तहत केंद्रीय पूल से राज्य सरकारों को चावल और गेहूं की बिक्री रोक दी है. इस कदम से गरीबों को मुफ्त अनाज देने वाले कर्नाटक सहित कुछ राज्यों पर असर पड़ेगा. हालांकि कर्नाटक सरकार को इस फैसले से पहले ही अवगत करा दिया गया है जिसने जुलाई के लिए बिना ई-नीलामी के ओएमएसएस के तहत अपनी योजना के लिए 3,400 रुपये प्रति क्विंटल की दर से 13,819 टन चावल मांगा था.

भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के हाल ही में जारी एक आदेश के अनुसार, ‘‘राज्य सरकारों के लिए ओएमएसएस (घरेलू) के तहत गेहूं और चावल की बिक्री बंद कर दी गई है.''

हालांकि ओएमएसएस के तहत पूर्वोत्तर राज्यों, पहाड़ी राज्यों और कानून और व्यवस्था की स्थिति का सामना कर रहे राज्यों, प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित राज्यों के लिए 3,400 रुपये प्रति क्विंटल की मौजूदा दर पर चावल की बिक्री जारी रहेगी.

एफसीआई बाजार की कीमतों को कम करने के लिए जरूरत के मुताबिक केंद्रीय पूल स्टॉक से ओएमएसएस के तहत निजी कारोबारियों को चावल दे सकती है.

गत 12 जून को केंद्र सरकार ने 31 मार्च, 2024 तक गेहूं पर स्टॉक सीमा लगाते हुए खुले बाजार की कीमतों को कम करने और जमाखोरी पर अंकुश लगाने के लिए ओएमएसएस के तहत चावल और गेहूं दोनों को जारी करने की भी घोषणा की थी.

सरकार ने ई-नीलामी के जरिये आटा मिलों, निजी व्यापारियों और गेहूं उत्पादों के निर्माताओं को केंद्रीय पूल से ओएमएसएस के तहत 15 लाख टन गेहूं की बिक्री करने की घोषणा की थी. हालांकि, उसने ओएमएसएस के तहत बिक्री के लिए इन व्यापारियों के लिए चावल की मात्रा तय नहीं की थी.

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केंद्र सरकार गत 26 जनवरी को 2023 के लिए ओएमएसएस नीति लेकर आई थी, जिसके तहत राज्यों को ई-नीलामी में भाग लिए बिना अपनी योजनाओं के लिए एफसीआई से चावल (पोषक तत्व से समृद्ध चावल सहित) और गेहूं दोनों खरीदने की अनुमति दी गई थी.