यह ख़बर 22 जून, 2012 को प्रकाशित हुई थी

सीमेंट कंपनियों पर साठगांठ करने के मामले में 6,200 करोड़ रुपए का जुर्माना

खास बातें

  • प्रतिस्पर्धा संबंधी निगरानी संस्थान सीसीआई ने 11 प्रमुख कंपनियों को गुट बनाकर बाजार दाम बढ़ाने का दोषी करार देते हुए 6,200 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया है।
नई दिल्ली:

प्रतिस्पर्धा संबंधी निगरानी संस्थान भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने गुरुवार को 11 प्रमुख कंपनियों को गुट बनाकर बाजार दाम बढ़ाने का दोषी करार देते हुए 6,200 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया है जिनमें एसीसी, अंबुजा सीमेंट्स, अल्ट्राटेक और जेपी सीमेंट्स शामिल हैं।

इनमें ग्रासिम सीमेंट्स (जिसका अब अल्ट्राटेक सीमेंट्स में विलय हो गया है), लाफार्ज इंडिया, जे के सीमेंट, इंडिया सीमेंट्स्, मद्रास सीमेंट्स, सेंचुरी सीमेंट्स और बिनानी सीमेंट्स शामिल हैं। आयोग ने सीमेंट मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन (सीएमए) पर भी जुर्माना लगाया गया है। प्रतिस्पर्धा कानून का उल्लंघन करने वाली कंपनियों को 90 दिन के भीतर जुर्माना जमा करने का निर्देश दिया गया है।

एक आधिकारिक बयान में कहा गया ‘‘सीसीआई ने पाया कि सीमेंट विनिर्माताओं ने प्रतिस्पर्धा अधिनियम 2002 के प्रावधानों का उल्लंघन किया है, इस कानून के तहत गुट बनाने समेत प्रतिस्प्र्धा रोधी सौदों से निपटा जाता है।’’ बयान में कहा गय कि यह जुर्माना 2009-10 और 2010-11 के बीच कंपनियों द्वारा कमाए गए मुनाफा का 50 फीसद हिस्सा है।

बिल्डर्स ऐसोसिएशन आफ इंडिया की शिकायत पर जांच महानिदेशक की जांच के बाद सीसीआई ने यह आदेश दिया। सीसीआई ने पाया कि सीमेंट कंपनियों ने उपलब्ध क्षमता का उपयोग नहीं किया ताकि वे बाजार में आपूर्ति घट जाए और वे मांग के दबाव के साथ कीमत बढ़ा सकें।

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सीसीआई ने महसूस किया कि बाजार में आपूर्ति सीमित करने या नियंत्रित करने के संबंध में इन कंपनियों की भूमिका न सिर्फ उपभोक्ताओं के लिए ही नहीं बल्कि पूरी अर्थव्यवस्था के लिए नुकसानदेह है क्योंकि निर्माण में सीमेंट का उपयोग मुख्य तौर पर होता है और बुनियादी ढांचा उद्योग देश की आर्थिक वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण है।