आप एचआरए और होम लोन दोनों पर टैक्स छूट का दावा कर सकते हैं? पढ़ें लेख...
खास बातें
- टैक्स छूट के लिए एचआरए और होम लोन दोनों पर दावा संभव है
- लेकिन इसके लिए कुछ नियम हैं जिन्हें जानना जरूरी है
- नियमों के पालन के बाद भी आखिरी फैसला इनकम टैक्स विभाग का होगा
नई दिल्ली: यदि आपके मन में भी यह सवाल आता हो कि क्या आप टैक्स छूट के लिए एचआरए और होम लोन दोनों पर दावा कर सकते हैं? तो इसका जवाब है, हां, आप ऐसा कर सकते हैं. यदि आप किराए के मकान में रहते हैं और एक अन्य प्रॉपर्टी के लिए होम लोन भी आपने लिया हुआ है जिसकी किश्त आप जमा करते हैं, तब आप टैक्स बेनिफिट दोनों चीजों पर ले सकते हैं. इस सुविधा का लाभ आप तब भी उठा सकते हैं जब आपकी प्रॉपर्टी भी उसी शहर में जिसमें आप रहे हों.
लेकिन, 'इनकम टैक्स डिपार्टमेंट इस स्थिति पर बारीक नजर रख सकता है, खासतौर से तब जब यह रकम काफी अधिक हो और वह इन दोनों पर किए गए दावों में से किसी एक का दावा निरस्त भी कर सकता है यदि टैक्स प्रदाता ने इस संबंध में किए गए दावों पर उचित स्पष्टीकरण न दिया हो.' यह कहना है अशोक महेश्वरी ऐंड असोसिएट्स एलएलपी अमित महेश्वरी का.
महेश्वरी ने ऐसे कुछ केसों का उदाहरण दिया जहां टैक्स विभाग, हो सकता है, सवाल न उठाए :
- जब व्यक्ति वर्ष विशेष में किराए के घर से अपने मालिकाना हक वाले घर में शिफ्ट हुआ या फिर अपने मालिकाना हक वाले घर से किराए के घर में शिफ्ट हुआ हो.
- जब व्यक्ति का खुद का घर छोटा हो और व्यक्ति किराए के बड़े मकान में शिफ्ट हुआ हो.
- जब व्यक्ति के बच्चे उस लोकेलिटी में पढ़ाई कर रहे हों जहां किराए का घर व्यक्ति ने लिया हुआ हो और साल के बीच में व्यक्ति के लिए उनका स्कूल शिफ्ट करना संभव न हो, जिसके चलते वह खुद भी नए मकान में (जिसे उसने खरीदा हो) न जा पा रहा हो.
- लेकिन कुछ अन्य मामलों में, टैक्स विभाग एचआरए और होम लोन दोनों मामलों में टैक्स छूट लेने पर सवाल उठा सकता है.
महेश्वरी के मुताबिक, इन सभी परिस्थितियों में व्यक्ति को यह सुनिश्चित करना होगा जब इनकम टैक्स विभाग सवाल करे तो उसके पास संबंधित दस्तावेज (लीज दस्तावेज, पजेशन और मकान पूरा होने के लेटर आदि) और न्यायसंगत तर्क होना चाहिए.
सैलरी क्लास लोग जो किराए पर रहते हैं वे टैक्स में कटौती के लिए एचआरए क्लेम कर सकते हैं. वह आशिंक रूप से टैक्स मुक्त होता है. हालांकि यदि व्यक्ति किराए के घर में नहीं रहता है तो एचआरए पूरी तरह से करयुक्त होता है.
इनकम टैक्स एक्ट की धारा सेक्शन 10 (13ए) के तहत नीचे दिए गए विकल्पों में से जो भी व्यक्ति के मामले में सबसे कम हो, उसके आधार पर एचआरए से टैक्स कटेगा :- नियोक्ता की ओर से प्राप्त हुई वास्तविक एचआरए
- बेसिक सैलरी + डीए का 50 फीसदी उन लोगों के लिए जो मेट्रो शहरों में रह रहे हैं. जो लोग नॉन-मेट्रो शहरों में रह रहे हैं, उनके लिए 40 फीसदी.
- चुकाया गया किराया जोकि सैलरी के 10 फीसदी से कम हो
दूसरी ओर, यदि आप होम लोन चुका रहे हैं तो आप प्रिंसिपल अमाउंट और इंट्रेस्ट जो कि आप दे रहे हैं, पर टैक्स छूट का दावा कर सकते हैं. प्रिंसिपल पेमेंट पर, सेक्शन 80 सी के तहत, 1.5 लाख रुपए तक की छूट ले सकते हैं. इंट्रेस्ट रीपेमेंट पर, सेक्शन 24 की धारा के तहत, 2 लाख रुपए तक की छूट का दावा किया जा सकता है.
इस साल के बजट में, सरकार ने पहली बार मकान खऱीद रहे लोगों के लिए होम लोन के ब्याज के मामले में 50 हजार रु एक्स्ट्रा-छूट की घोषणा की गई है. लेकिन यहां यह है कि 35 लाख रुपए से अधिक का लोन न लिया गया हो और प्रॉपर्टी की वैल्यू 50 लाख रुपए तक हो.