यह ख़बर 18 मार्च, 2011 को प्रकाशित हुई थी

एक करदाता को मिले एक ही पैनकार्ड : कैग

खास बातें

  • मार्च 2010 तक 958 लाख पैन जारी किए गए जबकि पिछले साल आईटी रिटर्न भरने वालों की संख्या केवल 340.9 लाख है।
New Delhi:

सरकारी अंकेक्षक कैग ने स्थायी खाता संख्या :पैन: धारकों तथा दाखिल किए जाने वाले आयकर रिटर्न की संख्या में भारी अंतर पाते हुए शुक्रवार को आयकर विभाग से यह सुनिश्चित करने को कहा है कि एक करदाता को अनेक पैन कार्ड जारी नहीं किए जाएं। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक :कैग: ने प्रत्यक्ष करों :2010-11: के बारे में अपनी रपट शुक्रवार को संसद में पेश की जिसमें कहा गया है कि मार्च 2010 तक 958 लाख पैन जारी किए गए जबकि पिछले साल आईटी रिटर्न भरने वालों की संख्या केवल 340.9 लाख है। कैग का कहना है कि पैन धारकों तथा आईटी रिटर्न जमा कराने वालों की संख्या में 617.1 लाख का अंतर है। कैग ने सुझाव दिया है कि केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड इस अंतर के कारणों का पता लगाए। कैग का कहना है कि यह अंतर एक ही करदाता को कई पैनकार्ड जारी करने तथा कुछ पैन धारकों की मृत्यु के कारण हो सकता है। रपट में कहा गया है कि आयकर विभाग को डुप्लीकेट पैन समाप्त करने के लिए उचित कदम उठाने चाहिए।


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