खास बातें
- कैग ने नए कानून में अपने अधिकारों का दायरा बढ़ाए जाने की मांग की है। प्रस्तावित कैग विधेयक वित्त मंत्रालय के विचाराधीन है जिसे संसद के अगले सत्र में पेश किए जाने की संभावना है।
नई दिल्ली: आर्थिक उदारीकरण की प्रगति के साथ सार्वजनिक व्यय के बदलते तौर तरीकों को देखते हुए भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) को अपने लेखापरीक्षा के अधिकार क्षेत्र में विस्तार की जरुरत महसूस हो रही है। कैग चाहता है कि उसे सेबी, ट्राई और इरडा जैसे नियामकों के कार्यनिष्पादन की लेखापरीक्षा का भी अधिकार मिलना चाहिए। यही वजह है कि कैग ने नए कानून में अपने अधिकारों का दायरा बढ़ाए जाने की मांग की है। प्रस्तावित कैग विधेयक वित्त मंत्रालय के विचाराधीन है जिसे संसद के अगले सत्र में पेश किए जाने की संभावना है। नया प्रस्तावित कानून कैग अधिनियम, 1971 का स्थान लेगा। आधिकारिक सूत्रों ने बताया, कैग दूरसंचार नियामक ट्राई, पूंजी बाजार नियामक सेबी और बीमा क्षेत्र के नियामक इरडा के खातों को देख रहा है, लेकिन अब वह उनके कामकाज की लेखापरीक्षा करना चाहता है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) कानून को बदलने के लिए वित्त मंत्रालय को पहले ही विधेयक का मसौदा सौंप चुका है। नए कानून का लक्ष्य कैग की लेखापरीक्षा जिम्मेदारियों का विस्तार करना है। अधिकारी ने कहा, हम नियामकों के कार्यनिष्पादन की लेखापरीक्षा करने की संभावना तलाश रहे हैं। हमने 1971 के कैग कानून की जगह एक नए कानून के लिए विधेयक का मसौदा पेश किया है जिसमें नियामकों एवं पीपीपी के वित्तीय ब्यौरों एवं निष्पादन के अंकेक्षण की अनुमति मांगी गई है। हमें उम्मीद है कि विधेयक को संसद के शीतकालीन सत्र में पेश कर दिया जाएगा। विधेयक के मसौदे में उन कंपनियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करने का प्रावधान है जो लेखापरीक्षक द्वारा मांगे गए ब्यौरे को देने में विलंब करती हैं। उन्होंने कहा, हमें यह सुनिश्चित करने का अधिकार नही है कि जब हम रिकार्ड मांगे तो उन्हें हमारे पास पेश किया जाए। हमारे पास दंड लगाने के अधिकार नहीं है और हमारे संसाधन सीमित हैं। एक बार विधेयक पारित होने पर, सार्वजनिक.निजी भागीदारी :पीपीपी: परियोजनाएं और पीएफआरडीए जैसे नियामक कैग की जांच के दायरे में आ जाएंगे। कंपनी अधिनियम, 1956 के तहत कैग केवल उन्हीं कंपनियों के खातों का अंकेक्षण कर सकता है जिनमें सरकार की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत या इससे अधिक है।