यह ख़बर 17 अगस्त, 2012 को प्रकाशित हुई थी

कैग ने दिल्ली हवाई अड्डे को रियायती जमीन देने की आलोचना की

खास बातें

  • कैग ने कहा कि नागर विमान मंत्रालय ने जीएमआर की अगुवाई वाली कंपनी डायल को 3,415 करोड़ रुपये से अधिक का फायदा पहुंचाने के लिए निविदा संबंधी शर्तों की अनदेखी की।
नई दिल्ली:

दिल्ली हवाई अड्डे में यात्रियों पर विकास शुल्क लगाए जाने की आलोचना करते हुए सरकारी अंकेक्षक कैग ने कहा कि नागर विमान मंत्रालय ने जीएमआर की अगुवाई वाली कंपनी डायल को 3,415 करोड़ रुपये से अधिक का फायदा पहुंचाने के लिए निविदा संबंधी शर्तों की अनदेखी की। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने इस मामले में जिम्मेदारी तय करने पर जोर दिया है।

कैग ने इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर अपनी ऑडिट रिपोर्ट में कहा है कि डायल को उस जमीन से 60 साल में 1,63,557 करोड़ रुपये की आय संभावित है, जो उसे 100 रुपये सालाना के पट्टे पर दी गई है।

इस रिपोर्ट को शुक्रवार को संसद में पेश किया गया। इसमें कहा गया है कि डायल को विकास शुल्क लगाने की अनुमति देना बोली प्रक्रिया की शुद्धता का उल्लंघन है और इससे इस निजी कंपनी को 3,415.35 करोड़ रुपये का अवांछित लाभ हुआ।

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दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (डायल) में जीएमआर इन्फ्रा की 54 प्रतिशत हिस्सेदारी है। कैग ने कहा है, यह नोट किया गया है कि नागर विमान मंत्रालय तथा भारतीय विमानपत्तन प्राधिकार ने कई मौकों पर सौदे दस्तावेजों के प्रावधानों का उल्लंघन रियायत पाने वाले के लिए किया।