यह ख़बर 16 मार्च, 2012 को प्रकाशित हुई थी

प्रणब की टिप्पणी पर सदन में लगे ठहाके

खास बातें

  • भाषण के दौरान माइक के गड़बड़ी के चलते पैदा व्यवधान पर मुखर्जी ने मुस्कुराते हुए कहा कि उन्हें भाषण दोबारा बोलने में कोई परेशानी नहीं है।
नई दिल्ली:

लोकसभा में शुक्रवार को अपना सातवां बजट पेश कर रहे केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी की एक टिप्पणी पर जमकर ठहाके लगे। भाषण के दौरान माइक के गड़बड़ी के चलते पैदा व्यवधान पर मुखर्जी ने मुस्कुराते हुए कहा कि उन्हें भाषण दोबारा बोलने में कोई परेशानी नहीं है।

दरअसल, जब प्रणब का भाषण शुरू हुआ तो माइक की गड़बड़ी के कारण सांसद उनकी आवाज ठीक से नहीं सुन पा रहे थे। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता यशवंत सिन्हा सहित अन्य नेताओं ने इस पर आपत्ति जताई। स्पीकर मीरा कुमार ने सदस्यों को गड़बड़ी दूर होने का आश्वासन देते हुए कहा कि लोकसभा के कर्मचारी इस समस्या को देख रहे हैं।

गड़बड़ी को देखते हुए प्रणब ने अपना भाषण बीच में ही रोककर अपना माइक जांचा। उन्होंने सदस्यों से पूछा कि क्या वह भाषण का पढ़ा जा चुका हिस्सा दोबारा पढ़ें? तब विपक्ष के एक सदस्य की टिप्पणी आई कि वित्त मंत्री अपना भाषण वापस ले रहे हैं।
इस पर प्रणब ने मुस्कुराते हुए कहा, "भाषण वापस लेने में कोई परेशानी नहीं है।" उनके इस जवाब से पूरे सदन में हंसी का माहौल बन गया। प्रणब ने भाषण का पढ़ा हुआ हिस्सा दोहराकर दोबारा शुरुआत की।

रेल बजट के संदर्भ में सदन में यह बात उठी। गौरतलब है कि रेल बजट के बाद संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार की सहयोगी तृणमूल कांग्रेस ने यात्री किराए में बढ़ोतरी वापस लेने की बात कही थी। इसी पर चुटकी लेते हुए प्रणब ने कहा था कि उन्हें 'भाषण' वापस लेने में कोई परेशानी नहीं।

यही नहीं बजट के दौरान प्रणब मुखर्जी को अंग्रेजी के महान उपन्यासकार शेक्सपीयर की मशहूर रचना 'हेमलेट' की याद आ गई। वित्त मंत्री के रूप में अपने काम को बेहद कठिन व प्रशंसारहित करार देते हुए मुखर्जी ने कहा, "वित्त मंत्री का जीवन आसान नहीं है।"

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अपने काम की दुविधा की तुलना शेक्सपीयर के उपन्यास 'हेमलेट' में वर्णित डेनमार्क के प्रिंस से करते हुए मुखर्जी ने कहा, "दयालु होने के लिए मुझे क्रूर बनना ही होगा।"