BQ Prime में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, यह मौजूदा सिस्टम में बड़ा बदलाव है, जहां पुरानी टैक्स व्यवस्था डीफ़ॉल्ट व्यवस्था है, और नई व्यवस्था को विशेष रूप से चुनना पड़ता है.
इस कदम की अहमियत इंसानी स्वभाव में छिपी है, क्योंकि यह सिद्ध तथ्य है कि लोगों के लिए मौजूद व्यवस्था से इतर चुनाव करना मुश्किल होता है. आमतौर पर लोग चुनाव के लिए कोई कदम नहीं उठाते, और डीफ़ॉल्ट विकल्प ही स्वाभाविक पसंद बन जाती है. इस मामूली बदलाव के बाद नई टैक्स व्यवस्था को निश्चित रूप से अधिक करदाता चुनेंगे.
नई टैक्स व्यवस्था के चुनाव को सुनिश्चित करने के लिए उसे आकर्षक बनाया गया है, जिसके लिए कई कदम उठाए गए हैं.
मानक कटौती (Standard Deduction)
वेतनभोगी वर्ग, और पेंशन तथा पारिवारिक पेंशन पाने वाले लोगों को पुरानी टैक्स व्यवस्था में मानक कटौती का लाभ मिला करता है. अच्छी ख़बर यह है कि अब यही एकमात्र कटौती है, जो नई टैक्स व्यवस्था में भी दी जाएगी. सो, अब नई टैक्स व्यवस्था में भी एक ऐसी छूट उपलब्ध होगी, जो करयोग्य आय में से घटाई जाती है.
स्लैबों में बदलाव
नई टैक्स व्यवस्था में मौजूदा स्लैब 2.5-2.5 लाख के ब्लॉक में हैं, सो, 2.5 लाख से 5 लाख तक की आय पर 5 फीसदी, अगले 2.5 लाख के ब्लॉक पर 10 फीसदी और आगे इसी तरह 2.5-2.5 लाख के ब्लॉक के हिसाब से टैक्स लगता है. अब इन ब्लॉकों को 3-3 लाख के ब्लॉकों में संशोधित कर दिया गया है, सो, 5 फीसदी का ब्लॉक अब 3 से 6 लाख तक की आय पर है, 10 फीसदी का ब्लॉक 6 से 9 लाख तक की आय पर है, और आगे भी इसी तरह.
टैक्स की देनदारी भी पहले से काफी कम हो गई है. उदाहरण के लिए, 10 लाख रुपये की आय पर 2 लाख रुपये की कुल छूट लेने वाला गैर-वेतनभोगी करदाता अब तक 72,500 रुपये (एजुकेशन सेस जोड़े जाने से पहले) इनकम टैक्स चुकाता रहा है, जबकि अब उसे नई टैक्स व्यवस्था में नई स्लैबों के हिसाब से सिर्फ 60,000 रुपये (एजुकेशन सेस जोड़े जाने से पहले) इनकम टैक्स के तौर पर चुकाने होंगे.
छूट
इनकम टैक्स एक्ट की धारा 87ए के तहत छूट उपलब्ध होती है, जिसमें आपकी करदेयता को घटा दिया जाता है, यदि आपकी आय एक निश्चित सीमा से कम होती है. पुरानी टैक्स व्यवस्था में मौजूदा सीमा 5 लाख रुपये है, जिसे नई टैक्स व्यवस्था में 7 लाख रुपये कर दिया गया है. इसका अर्थ हुआ कि अब पहले से कुछ ज़्यादा आय पर भी इनकम टैक्स नहीं देना होगा.
सरचार्ज
नई टैक्स व्यवस्था में रईसों की टैक्स देनदारी भी कुछ कम होगी, क्योंकि सरचार्ज की अधिकतम दर 37 फीसदी को घटाकर 25 फीसदी कर दिया गया है. पुरानी टैक्स व्यवस्था में 2 करोड़ रुपये से अधिक आय वालों से 37 प्रतिशत सरचार्ज वसूला जाता है. इस नए कदम से नई टैक्स व्यवस्था में अधिकतम टैक्स दर 39 फीसदी (सेस जोड़ देने के बाद) हो जाएगी.