यह ख़बर 29 मार्च, 2012 को प्रकाशित हुई थी

आपसी व्यापार में अपनी मुद्राओं के प्रयोग को बढ़ावा देंगे ब्रिक्स देश

खास बातें

  • ब्रिक्स देशों ने आज दो समझौतों पर हस्ताक्षर किए जिनके तहत वे व्यापारियों को ऋण सुविधा देंगे तथा विश्व बैंक की तर्ज पर ‘ब्रिक्स विकास बैंक’ के गठन की संभावना तलाशेंगे।
नई दिल्ली:

अपनी मुद्राओं में व्यापार को प्रोत्साहन देने की रणनीति के तहत ब्रिक्स देशों ने दो समझौतों पर हस्ताक्षर किए जिनके तहत वे व्यापारियों को ऋण सुविधा देंगे तथा विश्व बैंक की तर्ज पर ‘ब्रिक्स विकास बैंक’ के गठन की संभावना तलाशेंगे।

इन समझौतो पर यहां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान पांच सदस्य देशों-ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के अधिकारियों ने हस्ताक्षर किए। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बैठक के बाद जारी एक प्रेस वक्तव्य में कहा, ‘‘ब्रिक्स देशों में विकास ऋण देने वाले बैंकों द्वारा आज जो समझौते किए गए हैं उससे हमारी अपनी मुद्राओं में ऋण की सुविधा होगी और व्यापार को बढ़ाने में मदद मिलेगी।’’

स्थानीय मुद्रा में ऋण सुविधा प्रदान करने का मानक समझौता तथा बहुपक्षीय साख पत्र पुष्टिकरण सुविधा समझौता- इन दो समझौतों को ब्रिक्स के सदस्य देशों के बीच आपसी व्यापार में अमेरिकी डॉलर के प्रयोग की निर्भरता खत्म करने की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है।

अधिकारियों के इस तरह की पहल से ब्रिक्स के बीच न केवल व्यापार और निवेश को बढ़ावा मिलेगा बल्कि वैश्विक आर्थिक संकटों के समय भी सदस्य देशों की आर्थिक वृद्धि की संभावनाओं के संरक्षण में मदद मिलेगी। ब्रिक्स विकास बैंक की स्थापना के बारे में सिंह ने कहा कि इस पर सदस्य देशों के वित्त मंत्रियों द्वारा विचार किया जाएगा।

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प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘ब्रिक्स विकास बैंक की स्थापना के बारे में सुझाव आये हैं। हम लोगों ने अपने-अपने वित्त मंत्रियों को इस प्रस्ताव की समीक्षा कर अगले शिखर सम्मेलन तक रिपोर्ट देने के लिए कहा है।’’