खास बातें
- काले धन का पता लगाने के लिए बढ़ते दबाव के बीच सरकार काले धन का आकलन करने और कालेधन के अन्य पहलुओं का गहन अध्ययन करा रही है।
नई दिल्ली: काले धन का पता लगाने के लिए बढ़ते दबाव के बीच सरकार देश विदेश में जमा काले धन का आकलन करने और कालेधन के अन्य पहलुओं का गहन अध्ययन करा रही है। वित्त मंत्रालय द्वारा शुरू कराया गया काम 16 माह में पूरा किया जाएगा। देश के तीन शीर्ष स्तर के संस्थान इस काम को अंजाम देंगे। साथ ही ये यह भी बताएंगे कि मनी लांड्रिंग के लिए क्या तौर तरीके अपनाए जाते हैं, काले धन की वजह क्या है और किन किन क्षेत्रों में सबसे ज्यादा काली कमाई की जा रही है। अध्ययन शुरू कराने वाले वित्त मंत्रालय का कहना है, अभी तक इस तरह का कोई पुख्ता अनुमान उपलब्ध नहीं है कि देश और देश के बाहर कितना काला धन सृजित हो रहा है। अध्ययन में यह भी बताया जाएगा कि किस तरह काले धन को पकड़ा जाए और उस पर अंकुश लगाते हुए उसे कर दायरे में लाया जाए। यह अध्ययन मार्च में शुरू किया गया है। नेशनल काउंसिल फार एप्लाइड इकनॉमिक रिसर्च (एनसीईएआर), नेशनल इंस्ट्टियूट ऑफ पब्लिक फाइनेंस एंड पालिसी (एनआईपीएफपी) और नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ फाइनेंशियल मैनेजमेंट (एनआईएफएम) द्वारा यह अध्ययन किया जा रहा है। काले धन पर सबसे पहला अध्ययन करीब 26 साल पहले 1985 में एनआईपीएफपी ने किया था। मंत्रालय ने कहा कि अनुमान विश्वसनीय नहीं है। यह 462 अरब डॉलर से 1,400 अरब डॉलर के बीच का अनुमान है। सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे सहित मंत्रियों की संयुक्त समिति लोक विधेयक के मसौदे पर काम कर रही है। वहीं योग गुरु रामदेव ने काले धन के मसले पर 4 जून से भूख हड़ताल करने की धमकी दी है। सरकार ने एक उच्चस्तरीय समिति भी बनाई है, जो इस तरह के धन को जब्त करने उसे राष्ट्रीय संपदा घोषित करने का का कानूनी ढांचा सुझाएगी। इस समिति में केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के अध्यक्ष भी शामिली होंगे।