नई दिल्ली: महिंद्रा एंड महिंद्रा के चेयरपर्सन आनंद महिंद्रा के लाखों फैंस है. फैंस इसलिए नहीं है कि वे महिंद्रा एंड महिंद्री जैसी बड़ी कंपनी के चेयरमैन हैं या फिर वे अरबपतियों की सूची में शामिल हैं बल्कि लोग उनसे सीखना चाहते हैं. उनकी सोच को समझना चाहते हैं और अपने जीवन स्तर को भी बदलना चाहते हैं. ऐसे में जब आनंद महिंद्रा सोशल प्लेटफॉर्म ट्विटर पर जब ट्वीट करते हैं तो वह समाज के लिए संदेश लिए रहता है. यह संदेश केवल समाज के लिए नहीं होता बल्कि देश के दिशान देने के लिए भी होता है. आनंद महिंद्रा देश की आर्थिक गतिविधियों को करीब से देखते हैं. राजनीतिक गतिविधियों पर भी नजर रखते हैं.
उनके ट्वीट बताते हैं कि क्या करना चाहिए और क्या होना चाहिए. वे स्पष्ट नहीं कहते हैं लेकिन इशारों में काफी कुछ कह देते हैं. नए खोजों को उनकी ओर से दी गई इज्जत कई लोगों की जिंदगी बदल देती है और कई बार तो वह स्वयं ही अपनी ओर से कदम उठाते हुए जरूरतमंदों की मदद कर देते हैं. इस बारे में काफी बार चर्चा होती है.
आज उन्होंने कुछ देर पहले ही एक वीडियो डाला है. जिसमें हग टोड जो कि गुयाना के विदेश मंत्री हैं. उनका ये वीडियो सितंबर 2022 का है. इस वीडियो में गुयाना के विदेश मंत्री कह रहे हैं कि भारत को 130 करोड़ लोगों का ख्याल रखना होता है. वो भी एक लोकतंत्र में और सबकुछ शांति से करना होता है बदलाव होते है. क्या आप सोच सकते हैं कि 130 करोड़ लोगों का ख्याल रखना और इसके बावजूद वह पॉलिसी लेवल पर समय निकालकर दुनिया के लिए भी काम करता है. जबकि मल्टीलेटरल इंस्टीट्यूशंस को यह करना चाहिए इसलिए मैं हिम्मत के साथ कहना चाहता हूं कि भारत अपने आप में एक मल्टीलेटरल संस्थान है. जब आप भारत के दृढ़निश्चय को मानवता के प्रति सेवाभाव की दृष्टि से देखते हैं, तो साफ दिखता है कि भारत ग्लोबल लेवल पर लीडरशिप दे रहा है. ये तारीफ के काबिल है, भारत जैसे देश के लिए... एक देश जो 75 साल पहले आजाद हुआ है. इसके बारे में सोचिए, हमारी जिंदगी में हमने इंडस्ट्रीलाइज्ड इकोनोमी को देखा है, जिन्हें कभी कॉलोनाइज्ड नहीं किया गया, कुछ कोलोनाइज्ड हुए, लेकिन आपको यह इस प्रकार का व्यवहार और सेवाभाव नहीं मिलता है.
इस वीडियो को साझा करते हुए आनंद महिंद्रा ने लिखा है कि यह नया वीडियो नहीं है. मेरे इनबॉक्स में अभी आया है. मैं इसे गर्व के साथ अपने पोते को दिखा रहा हूं. मैं आशा करता हूं कि ऐसे ही भारत को दुनिया के बच्चों को भी देखना चाहिए. केवल बढ़ती आर्थिक ताकत के रूप में ही नहीं बल्कि पॉजिटिव बदलाव करने वाली ताकत के रूप में देखा जाना चाहिए.
आज आनंद महिंद्रा के ट्वीट पर इतना ही... बाकी कुछ बेहतर हुआ तो फिर पेश करेंगे.