खास बातें
- एयर इंडिया के पायलटों के बिना बताए छुट्टी पर जाने के मामले को दिल्ली हाईकोर्ट ने काफी गंभीरता से लिया है और हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसी हड़ताल की अनुमति नहीं दी जा सकती है।
नई दिल्ली: एयर इंडिया के पायलटों के बिना बताए छुट्टी पर जाने के मामले को दिल्ली हाईकोर्ट ने काफी गंभीरता से लिया है और हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसी हड़ताल की अनुमति नहीं दी जा सकती है। इसके अलावा एयर इंडिया मैनेजमेंट ने 26 और पायलटों को बर्खास्त कर दिया है। यह सभी पायलट बीमारी का बहाना बनाकर काम पर नहीं आए थे। बता दें कि मंगलवार को भी मैनेजमेंट 10 पायलटों को बर्खास्त कर दिया था।
दिल्ली हाईकोर्ट केंद्र सरकार की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस मामले पर अगली सुनवाई 13 जुलाई को होगी। कोर्ट ने कहा है कि पायलट खुद को बीमार बताकर हड़ताल नहीं कर सकते हैं, साथ ही वे एयरलाइंस के दफ्तरों के 200 मीटर तक के दायरे में भी हड़ताल न करें।
उधर, सरकार ने कहा है कि वह कर्मचारियों की किसी वाजिब शिकायत पर बातचीत करने को तैयार है, लेकिन कामकाज में बाधा और बातचीत एक साथ नहीं चल सकती। संसद भवन परिसर में नागर विमानन मंत्री अजीत सिंह ने संवाददाताओं से कहा वह इन परिस्थितियों में एयर इंडिया को पुनर्जीवित करने के लिए अनंत काल तक पैसा नहीं दे सकती।
उन्होंने कहा, एयर इंडिया लगभग दिवालिया हो गया है। जनता के 30 हजार करोड़ रुपये इसे पुनर्जीवित करने के लिए खर्च किया जाना है, लेकिन नियमित अंतराल पर इस प्रकार से काम बाधित करना पूरी तरह गलत है। बिना किसी नोटिस के छोटी-छोटी बात पर और अपने को बीमार बताकर हड़ताल पर जाने को किसी तरह से सही नहीं ठहराया जा सकता है।
मंत्री ने कहा कि इस तरह के कार्यों से यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इन परिस्थितियों में हम एयर इंडिया को पुनर्जीवित करने के लिए अनंतकाल तक पैसा नहीं दे सकते। अजीत ने कहा, जहां तक प्रोन्नति का सवाल है न्यायमूर्ति धर्माधिकारी समिति की रिपोर्ट के आलोक में इस विषय पर विचार किया जाएगा। इस विषय पर पायलटों से विचार-विमर्श करने के बाद ही कोई निर्णय किया जाएगा।
यह पूछे जाने पर कि सरकार ने क्या आपात स्थिति से निपटने के लिए कोई योजना तैयार की है, मंत्री ने कहा, ऐसी स्थिति से निपटने के लिए योजना है। हम संख्या में कटौती कर सकते हैं। हम बातचीत को तैयार हैं। कामकाज में बाधा और बातचीत एक साथ नहीं चल सकती। गौरतलब है कि एयर इंडिया की हड़ताल का मुद्दा लोकसभा में भी उठा और भाकपा के गुरूदास दासगुप्ता ने राष्ट्रीय एयरलाइंस को पुनर्जीवित करने और निजी कंपनियों को संरक्षण न देने की मांग की। कई अन्य सदस्यों ने इस विषय से अपने को संबद्ध किया।