यह ख़बर 12 मई, 2012 को प्रकाशित हुई थी

एयर इंडिया विवाद : पायलटों ने वार्ता के लिए हामी भरी

खास बातें

  • लगातार पांच दिन से सामूहिक रूप से चिकित्सा अवकाश पर चल रहे एयर इंडिया के पायलटों ने शनिवार को कहा कि वे जारी गतिरोध को समाप्त करने के लिए सरकार के साथ बिना शर्त वार्ता के इच्छुक हैं।
नई दिल्ली/मुम्बई:

लगातार पांच दिन से सामूहिक रूप से चिकित्सा अवकाश पर चल रहे एयर इंडिया के पायलटों ने शनिवार को कहा कि वे जारी गतिरोध को समाप्त करने के लिए सरकार के साथ बिना शर्त वार्ता के इच्छुक हैं। पायलटों ने आरोप लगाया कि प्रबंधन उनकी मांगों को सुनने के लिए तैयार नहीं है।

इंडियन पायलट्स गिल्ड (आईपीजी) के अध्यक्ष जितेंद्र अवहाड ने कहा, "हम अपनी मांगों के संदर्भ में उन्हें (प्रबंधन) कई बार पत्र लिख चुके हैं। हम सरकार और प्रबंधन के साथ वार्ता एवं चर्चा करने के लिए बेहद उत्सुक हैं। हम एयर इंडिया को बचाना चाहते हैं।" उन्होंने कहा, "हमने वार्ता शुरू करने के लिए कोई शर्त नहीं रखी है। लेकिन हम इस बात से बेहद दुखी हैं कि सरकार एवं प्रबंधन हमसे पहले हड़ताल खत्म करने फिर वार्ता की बात कह रहा है कि जबकि तीन महीने पहले एक अन्य संगठन (इंडियन कॉमर्शियल पायलट्स एसोसिएशन) से हड़ताल के दौरान भी वार्ता हुई थी।"

इस बीच, हड़ताली पायलटों ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से इस मामले में हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है।

इससे पहले, नागर विमानन मंत्री अजित सिंह ने कहा था कि पायलट पहले काम पर वापस आएं फिर वार्ता होगी। सिंह ने कहा था, "यदि वे वार्ता करना चाहते हैं तो उन्हें पहले काम पर वापस आना चाहिए और तब सभी मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।" उन्होंने शुक्रवार को प्रधानमंत्री से मुलाकात कर स्थितियों से निपटने के लिए उठाए जा रहे उपायों के विषय में जानकारी दी।

एयर इंडिया ने पायलटों की अघोषित हड़ताल शनिवार को पांचवें दिन भी जारी रहने के कारण 14 उड़ानें रद्द कर दीं और कई उड़ानों की समय सारणी में बदलाव किया। कम्पनी की सस्ती सेवा एयर इंडिया एक्सप्रेस ने भी छह उड़ानें रद्द कीं।

एयर इंडिया के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "14 उड़ानें रद्द की गईं और घरेलू मार्गो पर कुछ उड़ानों की समय सारणी में बदलाव किया जा सकता है। हम हर घंटे स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं और यात्रियों को इसकी समय पर सूचना दे रहे हैं।"

अधिकारी ने कहा, "हमारी कार्यकारी और आरक्षित पायलटों की सेवा लेने की योजना है। हम प्रभावित मार्गों पर चार-पांच विमान किराये पर भी लेना चाहते हैं।"

कम्पनी ने अत्यधिक लम्बे मार्गों के लिए 15 मई तक टिकट की बिक्री बंद कर दी है और उसे रोजाना अमेरिका और यूरोप के कुछ गंतव्यों तथा शंघाई, हांगकांग और सिंगापुर के लिए 15 उड़ानें रद्द करनी पड़ रही हैं।

उधर, विमानन कम्पनी के अधिकारियों ने कहा, "हम एक योजना पर काम कर रहे हैं। इसके तहत अंतर्राष्ट्रीय मार्गो पर उड़ानों की एक न्यूनतम संख्या का संचालन किया जाएगा। अगले सप्ताह के शुरू से इस योजना पर अमल किया जा सकता है।"

पायलटों की अनुपलब्धता के कारण एयर इंडिया को बोइंग-777 बेड़े के सभी 17 विमानों को खड़ा करना पड़ा है। वहीं प्रति दिन 10 करोड़ रुपये का घाटा भी हो रहा है।

इस बीच एयर इंडिया प्रबंधन ने पिछले चार दिनों में हड़ताल पर गए 71 पायलटों को बर्खास्त कर दिया है और आईपीजी की मान्यता समाप्त कर दी है। कम्पनी ने नागरिक उड्डयन महानिदेशालय से अनुरोध किया है कि पायलटों के फ्लाइंग लाइसेंस समाप्त किए जाएं।

मंगलवार को आईपीजी के सदस्य बोइंग 787 ड्रीमलाइनर विमान को उड़ाने का प्रशिक्षण पूर्व विमानन कम्पनी इंडियन एयरलाइंस के पायलटों को देने के विरोध में सामूहिक रूप से चिकित्सा अवकाश पर चले गए थे।

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कम्पनी ने सर्वोच्च न्यायालय और दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका भी दाखिल की है।