खास बातें
- सरकार ने देश में कृषि योग्य भूमि घटने की बात को स्वीकार करते हुए कहा कि इसके बावजूद खाद्यान्न उत्पादन पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ा है।
नई दिल्ली: सरकार ने देश में कृषि योग्य भूमि घटने की बात को स्वीकार करते हुए मंगलवार को कहा कि इसके बावजूद खाद्यान्न उत्पादन पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ा है। राज्यसभा में घटती कृषि भूमि के बारे में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर हुई चर्चा के दौरान विभिन्न सदस्यों द्वारा मांगे गए स्पष्टीकरण के जवाब में कृषि राज्यमंत्री अरुण यादव ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि समूचे देश में कृषि योग्य भूमि 2005-06 में 18 करोड़ 27.4 लाख हेक्टेयर थी जो मामूली गिरावट के साथ 2008-09 में 18 करोड़ 23.8 लाख हेक्टेयर रह गई। उन्होंने कहा कि इस गिरावट के बावजूद खाद्यान्नों के उत्पादन पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2005-06 में जो कृषि उत्पादन 20 करोड़ 86 लाख टन था वह 2010-11 में बढ़कर 23 करोड़ 20.7 लाख टन : दूसरा अग्रिम अनुमान: हो गया। विभिन्न सदस्यों द्वारा कृषि भूमि का गैर.कृषि कार्यो के लिए बढ़ते उपयोग पर रोक लगाये जाने की मांग के संदर्भ में कृषि राज्यमंत्री ने कहा कि केन्द्र की ओर से कई उपाय किये गये हैं। इनमें राष्ट्रीय कृषि नीति, 2007, राष्ट्रीय पुनर्वास एवं पुर्नव्यवस्थापन नीति, 2007 तथा विशेष आर्थिक क्षेत्र के संबंध में नीति इत्यादि प्रमुख हैं।