5G नीलामी के बाद टैरिफ हाइक कर सकती हैं टेलीकॉम कंपनीज़. (प्रतीकात्मक तस्वीर)
नई दिल्ली: पिछले दिनों 5G स्पेक्ट्रम को लेकर नीलामी संपन्न हुई है. इस नीलामी में टेलीकॉम कंपनीज़ ने हाई-स्पीड एयरवेव्स के लिए रिकॉर्ड कुल 1.5 करोड़ की बोली लगाई है. यह भारत में अबतक की सबसे बड़ी स्पेक्ट्रम नीलामी रही है. 5जी नेटवर्क पर एकछत्र अधिकार पाने की कोशिश में बोली लगाने वालों को अपेक्षा से कहीं ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ा है. हालांकि, इसका असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर असर पड़ सकता है.
दरअसल, इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट में विश्लेषकों के हवाले से कहा गया है कि हो सकता है कि नीलामी के दौरान उम्मीद से ज्यादा खर्च कर चुकी टेलीकॉम कंपनीज़ अब क्षतिपूर्ति करना चाहें. रिपोर्ट में कहा गया है कि इसके लिए वो चार फीसदी तक टैरिफ बढ़ा सकती हैं.
नीलामी के दौरान रिलायंस जियो इन्फोकॉम सबसे बड़ी बोली लगाने वाली कंपनी रही. जियो ने नीलामी में पेश किए गए लगभग आधे एयरवेव्स पर बोली लगाई. विशेषज्ञों का कहना है कि जियो को अपने प्रतिद्वंद्वियों भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया जैसी कंपनियों के मुकाबले थोड़ा ज्यादा रेट बढ़ाने की जरूरत पड़ सकती है.
इस साल ही सरकार ने 5जी की नीलामी के लिए स्पेक्ट्रम यूजेज़ चार्ज (SUC) खत्म कर दिया था. यह दूरसंचार कंपनियों के लिए राहत की बात है, हो सकता है कि वो टैरिफ में ज्यादा बढ़ोतरी न करें.
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नोमुरा रिसर्च के मुताबिक, अगर कंपनियों ने SUC पर ठीक-ठाक बचत की है तो स्पेक्ट्रम के लिए कुल सालाना खर्च को देखते हुए उनको या तो ओवरऑल सबस्क्राइबर्स के लिए एक मॉडरेट 4 फीसदी अतिरिक्त हाइक करना होगा. या फिर 5जी प्लान्स पर 30 फीसदी का प्रीमियम वर्सेज़ पॉपुलर प्लान 84 दिनों में 1.5GB/day 4G डेटा में हाइक का कोई विकल्प देखा जा सकता है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि जियो को ज्यादा हाइक करने की जरूरत पड़ेगी क्योंकि इसका सालाना नेट स्पेक्ट्रम आउटले 5,290 करोड़ रुपये हैं, जो कि एयरटेल (1,430 करोड़) और वोडाफोन इंडिया (720 करोड़) के मुकाबले काफी ज्यादा है.
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