यह ख़बर 09 जनवरी, 2011 को प्रकाशित हुई थी

2जी घोटाला : बैंकों की भूमिका की जांच करेगी सीबीआई

खास बातें

  • यूनिनॉर और एसटेल समेत कुछ कंपनियों को 2जी स्पेक्ट्रम के आवंटन के बाद इन कंपनियों को एसबीआई सहित सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने ऋण उपलब्ध कराए थे।
नई दिल्ली:

2जी स्पेक्ट्रम आवंटन में कुछ निश्चित कंपनियों को ऋण उपलब्ध कराने वाले सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की भूमिका का पता लगाने के लिए सीबीआई ने एक प्रारंभिक जांच :पीई: रपट दर्ज की है। वर्ष 2007-08 में यूनिनॉर और एसटेल समेत कुछ कंपनियों को 2जी स्पेक्ट्रम के आवंटन के बाद इन कंपनियों को एसबीआई सहित सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने ऋण उपलब्ध कराए थे। आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि सीबीआई के बैंक प्रतिभूति एवं धोखाधड़ी प्रकोष्ठ द्वारा अज्ञात बैंक कर्मियों के खिलाफ प्रारंभिक जांच रपट दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि यह आरोप लगाया जा रहा है कि कुछ बैंकों ने निर्दिष्ट नियमों का कथित तौर पर उल्लंघन करते हुए दो ऐसी रीयल एस्टेट कंपनियों को ऋण उपलब्ध कराया जिन्होंने स्पेक्ट्रम हासिल कर दूरसंचार क्षेत्र में प्रवेश किया। सीबीआई द्वारा दर्ज की गई यह दूसरी प्रारंभिक जांच रपट है। इससे पहले सीबीआई ने दूरसंचार विभाग एवं निजी कंपनियों के अज्ञात अधिकारियों के खिलाफ आरंभिक जांच रपट दर्ज की थी। प्रारंभिक जांच रपट के मुताबिक, बैंकों ने जोखिम कारकों को पूरी तरह से नजरअंदाज करते हुए दो रीयल एस्टेट कंपनियों को 11,500 करोड़ रुपये से अधिक के ऋण उपलब्ध कराए। दूरसंचार विभाग द्वारा जारी लाइसेंस प्रपत्रों के आधार पर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों द्वारा यूनिटेक को 10,000 करोड़ रुपये और एसटेल को 1,538 करोड़ रुपये का कर्ज दिया। यूनिटेक को दिए गए 10,000 करोड़ रुपये में से एक बड़ा हिस्सा भारतीय स्टेट बैंक द्वारा जारी किया गया। एसबीआई ने वर्ष 2009-10 के दौरान युनिटेक को 8,050 करोड़ रुपये का ऋण उपलब्ध कराया। इसके अलावा कारपोरेशन बैंक, इलाहाबाद बैंक, साउथ इंडियन बैंक, केनरा बैंक, ओरियंटल बैंक आफ कामर्स, बैंक आफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक, स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक और यस बैंक द्वारा यूनिटेक को ऋण उपलब्ध कराया गया। वहीं दूसरी ओर, एसटेल को आईडीबीआई और आईडीबीआई ट्रस्टीशिप सर्विसेज लिमिटेड से जुलाई.नवंबर, 2009 के दौरान 1,538 करोड़ रुपये का ऋण हासिल हुआ।


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