यह ख़बर 24 अक्टूबर, 2011 को प्रकाशित हुई थी

कनिमोई, येदियुरप्पा की दिवाली मनेगी जेल में

खास बातें

  • भ्रष्टाचार के अलग-अलग आरोपों में पिछले दिनों गिरफ्तार अमर सिंह, कनिमोई, येदियुरप्पा और पांच अन्य में से केवल अमर सिंह की दीवाली घर में मनेगी।
नई दिल्ली:

भ्रष्टाचार के अलग-अलग आरोपों में पिछले दिनों गिरफ्तार समाजवादी पार्टी के पूर्व नेता व राज्यसभा सदस्य अमर सिंह, द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) की राज्यसभा सदस्य कनिमोई, कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा और पांच अन्य में से केवल अमर सिंह की दीवाली घर में मनेगी, जबकि अन्य प्रकाश के इस त्योहार में सलाखों के पीछे रहेंगे। दिल्ली उच्च न्यायालय ने अमर को उनके 'अत्यंत नाजुक' स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए सोमवार को नियमित जमानत दे दी, जबकि 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले में आरोपी कनिमोई और छह अन्य की जमानत याचिका पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत ने फैसला तीन अक्टूबर तक के लिए सुरक्षित रख लिया। वहीं, येदियुरप्पा की जमानत पर फैसला इसलिए नहीं हो सका, क्योंकि इसे लेकर वकीलों की दलील पूरी नहीं हो पाई। दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति सुरेश कैत ने अमर सिंह के स्वास्थ्य के सम्बंध में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की रिपोर्ट को ध्यान में रखते हुए उन्हें 50 लाख रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही जमानत राशि पर नियमित जमानत दे दी। उन्हें मिली नियमित जमानत का अर्थ यह है कि मामले की पूरी सुनवाई के दौरान वह जेल से बाहर रहेंगे। अपने 32 पृष्ठ के आदेश में न्यायमूर्ति ने कहा, "याचिकाकर्ता की चिकित्सा रिपोर्ट से प्रतीत होता है कि उनका स्वास्थ्य अत्यंत नाजुक अवस्था में है। चिकित्सकों ने संक्रमण से बचने के लिए उन्हें भीड़भाड़ वाले और प्रदूषित स्थानों पर जाने से मना किया है। जेल ऐसी जगह नहीं है जहां ऐसी स्थिति सम्भव हो।" न्यायालय ने उन्हें पासपोर्ट जमा करने और किसी गवाह को प्रभावित नहीं करने का निर्देश दिया है। उन्हें छह सितम्बर को वोट के लिए नोट मामले में गिरफ्तार किया गया था। उधर, सीबीआई की विशेष अदालत ने 2जी घोटाले में आरोपी कनिमोई और छह अन्य की जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया। अदालत उनकी जमानत पर फैसला तीन नवम्बर को सुनाएगी। इससे पहले सीबीआई ने विशेष अदालत के न्यायाधीश ओपी सैनी के समक्ष बताया कि उसे कनिमोई, कुसेगांव के निदेशक आसिफ बलवा एवं राजीव बी. अग्रवाल, सिनेयुग फिल्म के करीम मोरानी और कलैगनार टीवी के प्रबंध निदेशक शरद कुमार को जमानत दिए जाने पर आपत्ति नहीं है। विशेष लोक अभियोजक यूयू ललित ने अदालत में कहा, "पूरक आरोप पत्र में उक्त पांच लोगों के नाम हैं। उनके खिलाफ जो आरोप हैं उसमें उन्हें सिर्फ पांच साल तक की सजा हो सकती है। इसलिए मुझे उक्त पांचों आरोपियों को जमानत दिए जाने पर आपत्ति नहीं है।" जांच एजेंसी ने हालांकि स्वान टेलीकॉम के प्रमोटर शाहिद बलवा और पूर्व केंद्रीय दूरसंचार मंत्री ए. राजा के सचिव रहे आरके चंदौलिया की जमानत का विरोध किया। ललित ने कहा, "शाहिद बलवा और चंदौलिया के खिलाफ जो आरोप लगे हैं, उसमें उन्हें सात साल तक की सजा हो सकती है, इसलिए जमानत उनका अधिकार नहीं हो सकता।" शाहिद बलवा तथा चंदौलिया के वकील विजय अग्रवाल ने हालांकि इसका विरोध किया और कहा कि उनके मुवक्किलों और अन्य में फर्क नहीं किया जाना चाहिए। वहीं, वरिष्ठ वकील अल्ताफ अहमद ने अदालत को बताया कि 22 जून को सर्वोच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा था कि कनिमोई और शरद कुमार दोनों आरोप तय हो जाने के बाद नए सिरे से विशेष अदालत में जमानत के लिए अपील कर सकते हैं। इसी आधार पर जमानत याचिका दायर की गई है। दोनों के खिलाफ आरोप शनिवार को तय किए जा चुके हैं। इससे पहले विशेष अदालत, दिल्ली उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय ने भी कनिमोई की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। येदियुरप्पा की दीवाली भी इस बार सलाखों के पीछे गुजरेगी। कर्नाटक उच्च न्यायालय ने सोमवार को उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई के लिए 28 अक्टूबर की तिथि निर्धारित की। दलीलें अधूरी रह जाने की वजह से न्यायमूर्ति बीवी पिंटो ने उनकी जमानत पर सुनवाई स्थगित कर दी।


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