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डांस से जीता 5 रुपये इनाम, हिंदी सिनेमा को दीं 3 कल्ट क्लासिक जिनका नहीं कोई जोड़, नींद की गोलियों की ओवरडोज से हुई मौत

उनकी शादी प्रसिद्ध गायिका गीता दत्त (गीता रॉय) से हुई थी. पेशेवर सफलता के बावजूद वे व्यक्तिगत तनाव और अवसाद से जूझते रहे. 10 अक्टूबर, 1964 को दत्त अपने बिस्तर पर मृत पाए गए.

डांस से जीता 5 रुपये इनाम, हिंदी सिनेमा को दीं 3 कल्ट क्लासिक जिनका नहीं कोई जोड़, नींद की गोलियों की ओवरडोज से हुई मौत
गुरु दत्त का असली नाम वसंत कुमार शिवशंकर पादुकोण था
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नई दिल्ली:

गुरुदत्त छोटे थे तो उन्होंने नागिन डांस करते हुए एक फोटो खिंचवाई और उसके लिए उन्हें 5 रुपये का पुरस्कार भी मिला. बड़े होकर वो फिल्ममेकर बने तो उन्होंने प्यासा, कागज के फूल और साहेब बीवी और गुलाम जैसी कल्ट क्लासिक फिल्में बनाईं. 8 जुलाई को उनका जन्मदिन है. अपने समय से आगे की सोच रखने वाले गुरु दत्त, कमर्शियल भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े दिग्गजों में से एक माने जाते हैं. भले ही उन्होंने दस से भी कम फिल्में बनाईं, लेकिन उन्हें बॉलीवुड के 'गोल्डन एज' (सुनहरे दौर) की बेहतरीन फिल्में  कही जाती हैं. ये फिल्में आम लोगों से जुड़ने और अपनी कलात्मक व काव्यात्मक खूबियों के लिए जानी जाती हैं. साथ ही, उन्होंने ऐसे ट्रेंड सेट किए, जिनका असर आज भी बॉलीवुड पर दिखता है, लेकिन इतनी प्रतिभा के बावजूद, उनके करियर और जिंदगी पर दुख और त्रासदी का साया बना रहा.

गुरु दत्त का असली नाम वसंत कुमार शिवशंकर पादुकोण था. वह भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता, निर्देशक और निर्माता थे. 'प्यासा' और 'कागज के फूल' जैसी फिल्मों के लिए मशहूर, उन्होंने अपनी फिल्मों में काव्यात्मक कहानी कहने और प्रकाश के बेहतरीन इस्तेमाल से सिनेमा को एक नई ऊंचाई दी. 

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उनका जन्म 9 जुलाई 1925 को बैंगलोर में हुआ था. बचपन आर्थिक तंगी में बीता और उन्होंने अल्मोड़ा में मशहूर नर्तक उदय शंकर से नृत्य का प्रशिक्षण लिया. 1944 में उन्होंने पुणे की प्रभात फिल्म कंपनी में कोरियोग्राफर के रूप में अपना सफर शुरू किया. उन्होंने अपने निर्देशन की शुरुआत 'बाजी' (1951) से की.

गुरुदत्त ने 1944 में भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखा और प्रभात स्टूडियो में कोरियोग्राफर के तौर पर काम किया. वहां उनकी दोस्ती देव आनंद और रहमान खान से दोस्ती हुई, जिनसे वे फिल्म 'हम एक हैं' (1946) के दौरान मिले थे. इन दोस्तों ने बॉलीवुड में उनकी राह आसान कर दी. 1947 में प्रभात स्टूडियो बंद होने के बाद, दत्त मुंबई चले गए, जहां उन्होंने उस समय के जाने-माने निर्देशकों के साथ काम किया. जैसे 'गर्ल्स स्कूल' (1949) में अमिया चक्रवर्ती और 'संग्राम' (1946) में ज्ञान मुखर्जी के साथ.

इसके बाद उन्होंने 'आर-पार', 'मिस्टर एंड मिसेस 55', 'प्यासा', और 'साहिब बीबी और गुलाम' जैसी सदाबहार फिल्में बनाईं. 'कागज के फूल' (1959) भारत की पहली सिनेमास्कोप फिल्म थी. उनकी 'प्यासा' और 'कागज के फूल' को 'टाइम' पत्रिका की '100 सर्वश्रेष्ठ फिल्मों' की सूची में भी शामिल किया गया है.

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उनकी शादी प्रसिद्ध गायिका गीता दत्त (गीता रॉय) से हुई थी. पेशेवर सफलता के बावजूद वे व्यक्तिगत तनाव और अवसाद से जूझते रहे. 10 अक्टूबर, 1964 को दत्त अपने बिस्तर पर मृत पाए गए. उनकी मौत की वजह शराब और नींद की गोलियों का मिश्रण मानी गई. हालांकि इस बात पर अभी भी बहस होती है कि उनकी मौत एक दुर्घटना थी या आत्महत्या की सफल कोशिश. उनकी मौत के बाद गीता दत्त को गहरा मानसिक सदमा लगा और वे भी शराब पीने लगीं. आखिरकार शराब पीने की वजह से ही 1972 में लिवर सिरोसिस से उनकी मौत हो गई.10 अक्टूबर 1964 को मह 39 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया. 
 

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